कोरोना योद्धाओं की दर्द भरी दास्तान पर डॉ. हितेश की भावुक पोस्ट

बीजेपी नेता वाजपेई राजधानी भोपाल की हमीदिया अस्पताल में कोरोना का इलाज करा रहे हैं। इस बीच अस्पताल में लगातार जिंदगी की जंग लड़ रहे कोरोना संक्रमित मरीजों की देखभाल करने वाले कोरोना योद्धाओं को बीजेपी नेता हितेश वाजपेई ने भावुक शब्द में बयां किया है।

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। देशभर में कोरोना से स्थिति भयानक होती जा रही है। संक्रमण की चपेट में आए लोगों शारीरिक सहित मानसिक स्तर पर लगातार जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं। वह विपरीत परिस्थितियों में भी हिम्मत बनाए रखने के साथ-साथ औरों को हिम्मत और साहस भी दे रहे। इसी बीच अब भाजपा के वरिष्ठ नेता हितेश वाजपेई (hitesh vajpayee) ने कोरोना योद्धाओं की दर्द भरी दास्तां को शब्दों में उतारा है। बीजेपी नेता हितेश वाजपेई कोरोना (corona)  संक्रमित हैं।

बीजेपी नेता वाजपेई राजधानी भोपाल की हमीदिया अस्पताल (hamidia hospital) में कोरोना का इलाज करा रहे हैं। इस बीच अस्पताल में लगातार जिंदगी की जंग लड़ रहे कोरोना संक्रमित मरीजों की देखभाल करने वाले कोरोना योद्धाओं को बीजेपी नेता हितेश वाजपेई ने भावुक शब्द में बयां किया है। रिकवरी की जानकारी देते हुए बीजेपी नेता हितेश वाजपेई ने कहा कि शायद अब वह खतरे से बाहर है और स्थिर भी है। वहीं उन्होंने कोरोना योद्धाओं के अथक परिश्रम की तारीफ की है।

Read More: कोरोना संदिग्ध ने की आत्महत्या, परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर लगाया हत्या का आरोप

हितेश वाजपेई ने बताया साथियों आज आप सबकी दुआओं से मैं अब शायद खतरे से बाहर हूँ और स्थिर भी। एक बडा मार्मिक पहलू है की यहां के दो-तीन मंजिलों में हमारे डॉक्टर साथी, छात्र, उन्के परिवार के लोग भरे पड़े हैं। हरेक डॉक्टर अपना वेन-फ्लान लगाकर भी ड्यूटी कर रहा है और बहुत से साथी अथक परिश्रम कर रहे हैं। इन दिनों मैने बहुत बड़ी संख्या में उन्के इस भर्ती माता-पिता, बहने और घर के लोगों को मृत्यलोक जाते देखा है। फिर जैसे तैसे आपस में मदद कर वो दाह संस्कार करवाते हैं की घर के बाकी भर्ती लोगों को न पता लगे।

हितेश वाजपेई ने बताया बड़ी भयावह परिस्थितियों में ये सभी अनवरत युद्ध लड़ रहे हैं। कल रात ही कण्ट्रोल रुम की एक बिटिया ने अपने पिता को खो दिया। एक बेहद मेहनती प्रोफेसर ने अपनी माँ को खो दिया और पडौस में उसकी बहन संघर्ष रत है जिसको अभी पता भी नहीं है कि क्या हुआ। खैर तात्पर्य यह है की ये लोग अपनी केवल तन्ख्वाह के लिये काम नहीं कर रहे हैं अपितु अपने परिवार को भी खो रहे हैं। इनकी जो मदद हो सके करिये साहब ये विनती करता हूँ। अभी इन्हें थकने नहीं देना है और टूटने भी नहीं। बाकी आप सभी बुद्धिजीवी हैं ईश्वर आपको स्वस्थ रखे।