पंचायत चुनाव को लेकर हाईकोर्ट सख्त, शिवराज सरकार से माँगा जवाब

ऐसी स्थिति में राज्य सरकार द्वारा ग्राम पंचायतों की केवल मॉनिटरिंग की जा सकती है बल्कि पंचायत चुनाव के फैसले नहीं कर सकती।

इंदौर हाईकोर्ट

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। मध्यप्रदेश (madhya pradesh) में बार-बार स्थगित किए जा रहे त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव (Three tier panchayat elections) को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट (highcourt) सख्त नजर आ रही है। इस मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट इंदौर बेंच ने चुनाव आयोग (election commission) को नोटिस भेजा है। इसके साथ ही साथ साथ शिवराज सरकार से भी जवाब तलब किया है। वहीं सरकार को जवाब देने के लिए 2 सप्ताह का समय दिया गया है।

दरअसल मध्यप्रदेश में अधिकांश पंचायतों का कार्यकाल पूरा हो चुका है। बावजूद इसके पंचायत चुनाव पर रोक लगाई जा रही है। इस मामले में एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए इंदौर हाई कोर्ट ने सरकार को नोटिस भेजा है। इंदौर हाई कोर्ट द्वारा पूछा गया है कि जब प्रदेश में 28 सीटों पर उपचुनाव करवाई जा सकती है तो पंचायत चुनाव कराने में इतनी देरी क्यों हो रही है।

बता दें कि हाईकोर्ट में धार जिले के सरदारपुर निवासी द्वारा एक जनहित याचिका दायर की गई थी। जिसमें कहा गया था कि महामारी के नाम पर सरकार पंचायत चुनाव टल रही है लेकिन प्रदेश में विधानसभा सीटों पर उपचुनाव करवाए गए हैं। इस मामले में अब हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार को आदेश दिया है कि वह प्रदेश में जल्दी पंचायत चुनाव करवाएं।

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प्रदेश के अधिकतर पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने वाला है। वही संविधान के मुताबिक कार्यकाल समाप्त होने से पहले ही पंचायत चुनाव करवाए जाने चाहिए। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में भी स्पष्ट किया जा चुका है कि ग्राम पंचायत राज्य सरकार के अधीन संस्थाओं में नहीं सम्मिलित होती है। ऐसी स्थिति में राज्य सरकार द्वारा ग्राम पंचायतों की केवल मॉनिटरिंग की जा सकती है बल्कि पंचायत चुनाव के फैसले नहीं कर सकती।

हालांकि प्रदेश में कोरोना की स्थिति को देखते हुए लगातार पंचायत चुनाव को टाला जा रहा है। जनहित याचिका में कहा गया था कि शहरों के मुकाबले गांव में कोरोना महामारी के संक्रमण कम है। ऐसी स्थिति में जल्द ही प्रदेश में पंचायत चुनाव करवाए जाने चाहिए। इधर इस मामले में चुनाव आयोग के चुका है कि प्रदेश में चुनाव कराने जाने की तैयारी पूरी है।