झोलाछाप डॉक्टर के इलाज के बाद मासूम भाई बहन की मौत, सवालों के घेरे में प्रशासन

मरीज की हालत बिगड़ती है तो उसे आनन-फानन में जिला अस्पताल या जबलपुर, बनारस रेफर कर दिया जाता है.

सिंगरौली, राघवेन्द्र सिंह गहरवार।  मध्यप्रदेश सरकार (MP Government) प्रदेश में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के लाख दावे करे लेकिन इसकी जमीनी हकीकत कुछ और है। प्रदेश के कई जिले ऐसे हैं जहाँ झोलाछाप डॉक्टर (Jholachap Doctor) जाल की तरह फैले हैं और उनके जाल में नासमझ और गरीब लोग फंसकर अपनी जान दांव पर लगा रहे हैं। ताजा मामला सिंगरौली जिले का है जहाँ एक झोलाछाप डॉक्टर (Jholachap Doctor) के इलाज के बाद मासूम भाई बहन की मौत हो गई।

बताया जाता है कि सिंगरौली के गांव छमरछ में एक परिवार ने खाना खाया जिसके बाद मां सहित उसके बेटा और बेटी की हालत खराब हो गई। परिवार के लोग तीनों को लेकर निवास गांव में पवन मेडिकल स्टोर पर एक झोलाछाप डॉक्टर (Jholachap Doctor) के पास उपचार के लिए भागे। जहाँ झोलाछाप डॉक्टर (Jholachap Doctor) के इलाज के बाद भाई बहन 2 वर्षीय रितेश साकेत व 5 वर्षीय रोशनी साकेत की मौत हो गई। जबकि मान की हालत बिगड़ने पर उसे सीधी जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया है।

कलेक्टर ने दिए जाँच के आदेश 

ये पहला मामला नहीं है जब झोलाछाप डॉक्टर (Jholachap Doctor)के कारण मरीज मौत के काल में समा गया हो, ऐसी घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं लेकिन स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की लापरवाही के चलते जिले में झोलाछाप डॉक्टरों (Jholachap Doctor) की भरमार है। कहा तो ये जाता है कि स्वास्थ्य अमला इन पर कार्रवाई करने की बजाय संरक्षण प्रदान करता है। लेकिन दो मासूमों की मौत का मामला सामने आने के बाद जिला कलेक्टर राजीव रंजन मीणा ने जांच के आदेश दे दिए हैं।

बिना लाइसेंस के दवाओं का भंडारण भी करते हैं झोलाछाप डॉक्टर

झोलाछाप डॉक्टरों (Jholachap Doctor) द्वारा बिना पंजीयन के एलोपैथी चिकित्सा व्यवसाय ही नहीं किया जा रहा है, बल्कि बिना ड्रग लाइसेंस के दवाओं का भंडारण व विक्रय भी अवैध रूप से किया जा रहा है। दुकानों के भीतर कार्टून में दवाओं का अवैध तरीके से भंडारण रहता है। इन दिनों मौसमी बीमारियों का दौर शुरू हो रहा है। झोलाछाप डॉक्टरों (Jholachap Doctor) की दुकानें मरीजों से भरी पड़ी हैं। मौसम बदलने से उल्टी, दस्त, बुखार जैसी बीमारियां ज्यादा पनपती रहती हैं। झोलाछाप डॉक्टर (Jholachap Doctor)बीमारियों का फायदा उठाकर मरीजों को जमकर लूट रहे हैं।

फर्जी डिग्रीधारी डॉक्टरों की जिले में भरमार 

बीते कुछ वर्षों से फर्जी डिग्रीधारी डॉक्टरों की वृद्धि हुई है। ग्रामीण क्षेत्र में कोई मात्र फर्स्ट एड के डिग्रीधारी हैं तो कोई अपने आप को बवासीर या दंत चिकित्सक, मेडिसिन बता रहा है लेकिन इनके निजी क्लीनिकों में लगभग सभी गंभीर बीमारियों का इलाज धड़ल्ले से किया जा रहा है। कुछ झोलाछाप डॉक्टरों (Jholachap Doctor) ने तो अपनी क्लिनिक में ही ब्लड जांच, यूरीन जांच इत्यादि की सुविधा भी कर रखी है।

झोलाछाप डॉक्टरों की भरमार, मरीजों की जिंदगी से कर रहे खिलवाड़

नवागत सीएमएचओ के आने के बाद लोग को उम्मीद थी कि जिले में झोलाछाप डॉक्टरों (Jholachap Doctor) पर कार्यवाही हो सकती है लेकिन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के संरक्षण में झोलाछाप डॉक्टर खूब फल फूल रहे हैं। जिले में हर गांव-गांव में झोलाछाप डॉक्टरों (Jholachap Doctor) की भरमार है। चाय की गुमटियों जैसी दुकानों में झोलाछाप डॉक्टर मरीजों का इलाज कर रहे हैं। मरीज चाहे उल्टी, दस्त, खांसी, बुखार से पीड़ित हो या फिर अन्य कोई बीमारी से। सभी बीमारियों का इलाज यह झोलाछाप डॉक्टर (Jholachap Doctor) करने को तैयार हो जाते हैं। मरीज की हालत बिगड़ती है तो उसे आनन-फानन में जिला अस्पताल या जबलपुर, बनारस रेफर कर दिया जाता है, जबकि सीएमएचओ (CMHO), बीएमओ (BMO) भी ऐसे मामले में कोई कार्रवाई नहीं करते बल्कि जिले में धड़ल्ले से चल रहे झोलाछाप डक्टरों (Jholachap Doctor) को स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी संरक्षण देते नजर आते हैं।