MP News: एक बार फिर टल सकते हैं मप्र में निकाय और पंचायत चुनाव, आयोग ने कही ये बात

आयोग के अध्यक्ष वीपी सिंह (vp singh) ने भी कहा था कि अप्रैल में परीक्षाओं के कारण चुनाव नहीं कराया जाए सकेंगे लेकिन निकाय और पंचायत में से एक चुनाव जल्द कराने की तैयारी की जा रही है।

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। मध्यप्रदेश (madhya pradesh) में नगर निकाय चुनाव (Municipal elections) के ठंडे बस्ते में जाने के बाद और पंचायत चुनाव (panchayat election) पर भी ग्रहण लग सकते हैं। दरअसल केंद्र के निर्देश पर शिवराज सरकार (shivraj governmnt) ने मध्य प्रदेश पुलिस (MP Police) की 50 कंपनियों को विधानसभा चुनाव के लिए बंगाल (bengal) और तमिलनाडु (tamilnadu) भेजा है। जहां अब प्रदेश में सशस्त्र बल की उपलब्धता पंचायत चुनाव में बाधा बन रही है। इस मामले में गृह विभाग द्वारा राज्य निर्वाचन आयोग (State election commission) को सूचना दे दी गई है।

बता दे प्रदेश में नगर निकाय और पंचायत चुनाव कराने के लिए पर्याप्त सशस्त्र बल की उपलब्धता संशय की स्थिति बनी हुई है। सशस्त्र बल की कमी की सूचना गृह विभाग द्वारा राज्य निर्वाचन आयोग को भेजी जाने के बाद आयोग ने कहा है कि प्रदेश में दसवीं और बारहवीं बोर्ड परीक्षा (10th-12th board exam) से पहले प्रथम चरण का चुनाव करना प्रस्तावित किया गया है। हालांकि आरक्षण (reservation) को लेकर अभी तैयारी जारी है। साथ ही पंचायतों के आरक्षण के लिए भी शासन को पत्र लिखा गया है।

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वही सशस्त्र बल के तमिलनाडु और बंगाल भेजे जाने पर अपर मुख्य सचिव राजेश राजौरा (rajesh rajoura) का कहना है कि आयोग ने केंद्रीय गृह मंत्रालय के माध्यम से बल मांगा था, जो भेजा गया है। इस मामले में आयोग के सचिव दुर्ग विजय सिंह (durg vijay singh) का कहना है कि गृह विभाग ने पत्र लिखकर सशस्त्र बल की जानकारी से अवगत कराया है। जिसके बाद अब वहां चुनाव के लिए बल उपलब्ध कराने के बाद मध्य प्रदेश में चुनाव के लिए परेशानी बढ़ जाएगी। दुर्ग विजय सिंह का कहना है कि हमने पहले ही राज्य शासन को बताया है कि बोर्ड परीक्षा से पहले प्रथम चरण का चुनाव प्रस्तावित है। इसके मद्देनजर प्रदेश में इतना सशस्त्र बल अवश्य आरक्षित कर रखा जाए। जिससे सुरक्षा व्यवस्था में किसी तरह की कमी का सामना ना करना पड़े।

ज्ञात हो कि इससे पहले आयोग द्वारा कलेक्टर को निर्देश दिए गए थे कि चुनाव को देखते हुए तैयारियां पूरी रखें। इसके बाद ही संभावना जताई जा रही थी कि जल्द प्रदेश में पंचायत चुनाव कराए जा सकते हैं। वहीं दूसरी तरफ आयोग के अध्यक्ष वीपी सिंह (vp singh) ने भी कहा था कि अप्रैल में परीक्षाओं के कारण चुनाव नहीं कराया जाए सकेंगे लेकिन निकाय और पंचायत में से एक चुनाव जल्द कराने की तैयारी की जा रही है।

वहीं इससे पहले नगरी निकाय चुनाव पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट में राज्य शासन ने विशेष अनुमति याचिका दायर की है लेकिन अब तक उस पर सुनवाई नहीं हुई है। जबकि जिला पंचायत के अध्यक्ष पदों पर आरक्षण की प्रक्रिया भी अभी तक पूरी नहीं की गई है। हालांकि आयोग द्वारा 15 दिन में राज्य शासन को पंचायत के अध्यक्ष पदों की आरक्षण पूरी करने को कहा गया है लेकिन अभी तक इस मामले में कोई कार्रवाई शुरू नहीं की गई है। अब ऐसी स्थिति में यह माना जा रहा है कि नगरी निकाय चुनाव पंचायत चुनाव एक बार फिर से टाले जा सकते हैं।