MP School: इस दिन से खुलेंगे प्रदेश के स्कूल, आदेश तैयार

अभिभावकों का सवाल है कि बच्चों के इलाज का खर्च कौन उठाएगा और यदि किसी बच्चे की मृत्यु हो जाती है तो इसके खिलाफ किसपर मामला दर्ज किया जाएगा।

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भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। मध्य प्रदेश (Madhya pradesh) में मार्च महीने से प्रदेश में बंद पड़े स्कूलों (School) को खोलने की तैयारी तेज हो गई। इसके लिए लोक शिक्षण संचालनालय (Directorate of public education) द्वारा आदेश तैयार कर लिया गया है। वही 10वीं एवं 12वीं की कक्षा 14 दिसंबर से लगाई जा सकती है। जिसके लिए जल्द ही आदेश जारी किया जाएगा।

दरअसल निजी स्कूल संचालकों (Private school operators) के चेतावनी के बाद स्कूल शिक्षा विभाग (School Education Department) जल्द ही स्कूल खोलने पर कोई बड़ा निर्णय ले सकती है। इसके लिए गुरुवार को लोक शिक्षण संचालनालय आयुक्त जयश्री कियावत ने पदाधिकारियों के साथ बैठक की थी। जहां स्कूल खोलने को लेकर आदेश को तैयार कर लिया गया है।

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मिडिल स्कूल खोले जाने का दबाब

इतना ही नहीं शिवराज सरकार (Shivraj government) पर अब मिडिल स्कूल को खोलने का भी दबाव बनाया जा रहा है। स्कूल संचालकों का कहना है के विद्यार्थियों के हित के लिए 6वीं से 8वीं तक की नियमित कक्षाएं भी लगाई जाए। हालांकि अभी प्राइमरी स्कूल में नियमित कक्षाओं को खोले जाने पर कोई चर्चा नहीं की जा रही है।

डीपीआई कमिश्नर का बयान

इस मामले में डीपीआई कमिश्नर का कहना है कि निजी स्कूल संचालकों के मांगों को सुना गया है और 14 दिसंबर से पहले इस पर फैसला लिया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि स्कूल को बंद हुए 9 महीने बीतने जा रहे है। जिसके बाद प्रदेश में स्कूल खोलना भी आवश्यक है।

निजी स्कूल संचालकों की मांग 

वहीं निजी स्कूल संचालकों के साथ बैठक में आयुक्त के कहने पर संचालकों की मांग है कि उन्हें लिखित में आदेश जारी किया जाए इसके बाद ही वह अपना आंदोलन स्थगित करेंगे। इसके साथ ही संचालकों की भी मांग है की कक्षा एक से 12वीं तक के स्कूल की मान्यताओं में 5 वर्ष की वृद्धि के साथ-साथ 6वीं से 8वीं तक के मिडिल स्कूल 1 जनवरी 2021 से खोले जाए और वही 15 मई तक शैक्षणिक सत्र चलाया जाए। इसके साथ ही अभिभावकों को फीस जमा करने की एक एडवाइजरी भी जारी की जाए।

दूसरी तरफ अभिभावकों को कहना है कि वह अभी अपने बच्चों को स्कूल भेजने के लिए राजी नहीं है। प्रदेश में कोरोना (corona) का संक्रमण है और यदि नियमित कक्षाओं के दौरान बच्चे संक्रमित हो जाते है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी। अभिभावकों का सवाल है कि बच्चों के इलाज का खर्च कौन उठाएगा और यदि किसी बच्चे की मृत्यु हो जाती है तो इसके खिलाफ किसपर मामला दर्ज किया जाएगा।