MP School: शासकीय स्कूल के बच्चों के लिए सरकार की यह बड़ी व्यवस्था, मिल रहा लाभ

इसके लिए पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग ने 12.50 करोड़ रुपए खर्च किए हैं।

MP School

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। मध्यप्रदेश (madhya pradesh) में कोरोना संक्रमण (corona infection) के चलते शासकीय स्कूल (government school) बंद है। जिसके बाद प्रदेश के 1 लाख 13 हजार शासकीय स्कूल के बच्चों को घर जाकर मध्याह्न भोजन (Lunch) बांटा जा रहा है। इसके लिए प्रदेश के 70 हजार से ज्यादा स्व सहायता समूह की सेवा ली जा रही है। जिसके सदस्य विद्यार्थियों के घर घर जाकर उन्हें मध्याह्न भोजन पहुंचा रहे हैं। वही बच्चों को बांटे जा रहे सूखे अनाज की स्कूल स्तर पर फोटोग्राफी (photography) की जा रही है।

दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि को रोना काल में स्कूलों के बंद रहने पर भी बच्चों को मध्यान्ह भोजन मिलते रहना चाहिए। इसके बाद शिवराज सरकार ने शासकीय स्कूल के करीब 63 लाख से ज्यादा बच्चों को सूखा राशन की व्यवस्था की है। इसके लिए ब्लॉक से लेकर स्कूल स्तर पर वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी की व्यवस्था की गई है जिसकी निगरानी में बच्चों को सूखा राशन भिजवाया जा रहा है। वहीं इस कार्य के लिए प्रदेश के 70000 से अधिक स्व सहायता समूह की मदद ली गई है जिसके सदस्य बच्चों के घर घर पहुंच कर उन्हें सुखा राशन उपलब्ध करा रहे हैं।

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इस मामले में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री महेंद्र सिंह सिसोदिया (Mahendra Singh Sisodiya) का कहना है कि कोरोना काल में स्कूल बंद होने की वजह से यह कार्य चुनौतीपूर्ण हो गया है लेकिन हमने इसे पूरी तरह से संभव बनाया है। कोई भी बच्चा मध्यान्ह भोजन से वंचित ना रहे। इसके लिए प्रदेश के 63 लाख से ज्यादा बच्चों को खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है।

प्रदेश के 81300 प्राइमरी स्कूलों में पढ़ने वाले 39 लाख बच्चों को 100 ग्राम प्रति दिन के हिसाब से 3 किलो गेहूं या चावल, 2 किलो तुवर दाल और 523 ग्राम सोयाबीन तेल उपलब्ध कराए जा रहे हैं। जबकि 25 लाख से अधिक मिडिल स्कूल के छात्रों को डेढ़ सौ ग्राम प्रतिदिन के हिसाब से साडे 4 किलो गेहूं या चावल 3 किलो तुवर दाल और 783 ग्राम सोया तेल हर महीने उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

बता दें कि इस कार्य में लगे 70 हजार से अधिक स्व सहायता समूह के सदस्य को प्रति किलोग्राम 6.50 की दर से राशि उपलब्ध कराई जा रही है। इसके लिए पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग ने 12.50 करोड़ रुपए खर्च किए हैं।

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