बच्चों की मौत पर हड़कंप, कांग्रेस ने कहा- जनता के लिए सड़क पर उतरने वाले, खामोश क्यों?

कांग्रेस ने कहा जनता के लिए सड़क पर उतरने वाले लोग भी इस मामले में चुप्पी साधे हुए हैं। आखिर उन्हें बताना चाहिए कि बच्चों की मौत का जिम्मेदार कौन है।

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शहडोल, डेस्क रिपोर्ट। मध्यप्रदेश (Madhya pradesh) के शहडोल (shehdol) जिला अस्पताल में लापरवाही से 3 दिनों में 8 बच्चे की मौत ने प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। इस मामले में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Chief Minister Shivraj Singh Chauhan) ने अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए थे। वहीं इस मामले में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को तलब कर ली गई थी और रिपोर्ट मांगी गई थी। अब इस मामले में कांग्रेस (congress) ने राज्य सरकार पर आरोप लगाए है। कांग्रेस ने कहा है कि जनता के लिए सड़क पर उतरने वाले आज खामोश क्यों हैं।

दरअसल कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता केके मिश्रा (K.K.Mishra) ने ट्वीट (Tweet) करते हुए लिखा है कि शहडोल जिला अस्पताल में लापरवाही से 8 बच्चों की मौत हो गई है। जबकि सरकारी जांच दल कह रहा है कि इलाज ठीक था। अगर इलाज ठीक था तो बच्चे की मौत का जिम्मेदार कौन है।

इसके साथ ही केके मिश्रा ने कहा कि 20 बेड की क्षमता वाले अस्पताल में 32 बच्चे को भर्ती कराया गया है। प्रदेश की ऐसी व्यवस्था पर स्वास्थ्य मंत्री आखिर चुप क्यों हैं? क्या स्वास्थ्य मंत्री विदेश दौरे पर निकले हैं? वही केके मिश्रा ने कहा कि जनता के लिए सड़क पर उतरने वाले लोग भी इस मामले में चुप्पी साधे हुए हैं। आखिर उन्हें बताना चाहिए कि बच्चों की मौत का जिम्मेदार कौन है।

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बता दे कि मध्यप्रदेश के शहडोल जिले में कुशाभाऊ ठाकरे अस्पताल में 3 दिन के अंदर 8 बच्चों की मौत हो गई है। जिले में 8 बच्चे की मौत से हड़कंप की स्थिति मच गई है वहीं सीएम शिवराज ने अधिकारियों की आपात बैठक बुलाकर रिपोर्ट सौंपने की बात कही थी। जहां जांच दल ने माना है कि बच्चों का इलाज सही तरीके से किया गया है।

जिला अस्पताल में एक-एक कर बच्चों की हुई मौत पर स्वास्थ्य व्यवस्था वगैरह सवाल खड़े हो गए। इस मामले में पिछले दिनों पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ (kamalnath) ने कहा था कि शहडोल में मासूम बच्चों की मौत का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है जो कि बेहद चिंताजनक है। उन्होंने इस मामले में सरकार से गंभीरता से निर्णय लेने की बात कही थी। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने यह भी कहा था कि अगर जरूरत पड़ी तो बच्चों को प्रदेश के अन्य अस्पतालों में शिफ्ट कर सरकार अपने खर्च पर उनका इलाज करें।