केंद्रीय कृषि मंत्री का बड़ा बयान, किसान आंदोलन और परेड की जिद पर कही ये बात

गणतंत्र दिवस हमारा राष्ट्रीय त्योहार है । इसकी गरिमा किसानों के किसी भी कदम से प्रभावित ना हो ये जिम्मेदारी किसानों की भी है।

ग्वालियर, अतुल सक्सेना। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर (Union Agriculture Minister Narendra Singh Tomar) का कहना है कि सरकार कानूनों के प्रावधानों पर चर्चा करने के लिए खुले मन से तैयार है और चर्चा कर रही है लेकिन किसान यूनियन (Farmers union) के नेता प्रावधानों पर चर्चा नहीं करना चाहते इसीलिए गतिरोध बना हुआ है। उम्मीद है कल दसवें दौर की बातचीत में कोई रास्ता निकलेगा। केंद्रीय मंत्री ने किसानों (Farmers) के परेड की जिद पर कहा कि किसान (Farmers) के किसी भी कदम से गणतंत्र दिवस की गरिमा प्रभावित ना हो ये उनकी भी जिम्मेदारी है।

मुरैना (Morena)में जहरीली शराब (Poisonous Liquor) पीने से मृत हुए पीड़ितों से मिलकर ग्वालियर आये केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर (Union Agriculture Minister Narendra Singh Tomar) ने कहा कि मुरैना (Morena)की घटना दुर्भाग्य पूर्ण और शर्मनाक हैं इस घटना से समाज और प्रशासन को सबक लेना चाहिए। मध्यप्रदेश सरकार अपना काम कर रही है दोषियों को बक्शा नहीं जायेगा।

किसान आंदोलन (Farmers Protest) का हल अब तक नहीं निकल पाने के सवाल पर केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर (Union Agriculture Minister Narendra Singh Tomar)ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के नेतृत्व में हमारी सरकार ने किसानों (Farmers) के हित में कई फैसले लिए हैं। किसानों (Farmers) की माली हालत सुधारने, कृषि को मुनाफे में लाने के लिए कई योजनाएं बनाई। MSP को डेढ़ गुना किया। PM किसान सम्मान निधि योजना के तहत 75 हजार करोड़ रुपये प्रतिवर्ष किसानों को दिये जा रहे हैं। खेती किसानी फायदेमंद बने, किसान आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर सके, महंगी फसलों की तरफ जा सके, युवा किसानी की तरफ आकर्षित हो इसलिए दो नये बिल और एक में संशोधन कर तीन नये कानून बनाये हैं।

कल दसवें चरण की बातचीत, हल निकलेगा

केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर (Union Agriculture Minister Narendra Singh Tomar) ने कहा कि तीनों कानून किसानों (Farmers)के हित में हैं, लेकिन कुछ राज्यों में इन कानूनों पर आपत्ति है। उन्होंने कहा कि 9 चरण की बात हो चुकी है। हमने हमेशा कहा है कि किसान यूनियन (Farmers union) के लोग प्रावधानों पर चर्चा करें, और जिस प्रावधान पर तकलीफ है उस पर चर्चा और संशोधन के लिए सरकार खुले मन से चर्चा के लिए तैयार है लेकिन किसान यूनियन (Farmers union) के नेता प्रावधानों पर चर्चा नहीं कर रहे इसलिए गतिरोध बना हुआ है। कल दसवें चरण की चर्चा है और मुझे उम्मीद है कि कल किसान (Farmers) विकल्पों और प्रावधानों ओर चर्चा करेंगे जिससेे कोई रास्ता जरूर निकलेगा।

गणतंत्र दिवस की गरिमा प्रभावित ना हो ये किसानों की भी जिम्मेदारी

गणतंत्र दिवस 26 जनवरी को किसानों द्वारा दिल्ली में ट्रैक्टर परेड की घोषणा के सवाल पर केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर(Union Agriculture Minister Narendra Singh Tomar) ने कहा कि हमने आजादी बहुत मुश्किल से पाई है। गणतंत्र दिवस हमारा राष्ट्रीय त्योहार है । इसकी गरिमा किसानों (Farmers) के किसी भी कदम से प्रभावित ना हो ये जिम्मेदारी किसानों (Farmers) की भी है। इसलिए मैं उनसे अनुरोध करता हूँ कि वे अपने निर्णय पर पुनर्विचार करें।

कांग्रेस को किसानों के विषय में बोलने का अधिकार नहीं

कांग्रेस (Congress) के किसान समर्थन और मुरैना में 20 जनवरी को प्रस्तावित किसान महा पंचायत (Kisan Mahapanchayat) करने के सवाल पर केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर (Union Agriculture Minister Narendra Singh Tomar)ने कहा कि कांग्रेस (Congress) को तो किसानों (Farmers) की बात पर बोलने का अधिकार ही नहीं है। सही मायने में आज किसानों (Farmers) की जो दुर्दशा है उसकी जिम्मेदार कांग्रेस (Congress) है। कांग्रेस (Congress) ने 2019 के अपने घोषणा पत्र में इन्ही बातों का वायदा किया था पहले उसे मीडिया के माध्यम से जनता के सामने आकर उसे नकारना चाहिए। तभी उसे किसानों के आंदोलन (Farmers Protest) के विषय में बोलना चाहिए।

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