दिवाली पर जब हो जाए नई प्रतिमाओं की स्थापना तो फिर पुरानी मूर्तियों का क्या करे, देखे यह तरीका

डेस्क रिपोर्ट। दिवाली पूजा पर माता लक्ष्मी और श्री गणेश जी की नई मूर्ति स्थापित की जाती है। लेकिन पूजा के बाद पुरानी मूर्तियों  का क्या करें, इसके बारे में कई लोगो को सही जानकारी नहीं होती। जिसके चलते वे अनजाने में गलतियां करते चले जाते हैं।

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आज हम आपको बताते है कि पिछले वर्ष की इन मूर्तियों को कैसे विसर्जित किया जाए। दिवाली के मौके पर नई प्रतिमाओं की स्थापना के बाद लक्ष्मी-गणेश की पुरानी मुर्ति जिनकी वर्ष भर पूर्ण श्रद्धा भाव पूर्वक आपने पूजा की है, सबसे पहले उन मूर्तियों की ओर मुखातिब होकर बड़े विनम्र भाव एवं श्रद्धा पूर्वक प्रार्थना करें कि हे श्री गणेश जी आपने पूरे वर्ष कृपा मुझ पर एवं मेरे परिवार पर की है, इसलिए मैं आपसे प्रार्थना करता हूं कि आप इस नवीन मूर्ति में अपना स्थान ग्रहण करें, इसी प्रकार मां लक्ष्मी, विष्णु जी एवं अन्य देवी देवताओं का आवाहन कर स्थान दें। लक्ष्मी-गणेश की पुरानी मुर्तियों को यथास्थान पर ही विराजमान रहने दें। फिर लक्ष्मी-गणेश की नई मूर्तियों को रोली से टीका लगाएं, श्री गणेश जी को डंडी वाले पान के पत्ते पर घर का बना हलुआ एवं बूंदी के लड्डू, दूब घास, साबुत सुपाड़ी, पीले गेंदे  के फूल, एक ऋतु फल आदि श्रद्धा पूर्वक अर्पित करें। इसी प्रकार माता लक्ष्मी को घर की बनी खीर, खोये की बर्फी, खील बतासे, कमल पुष्प, गुलाब पुष्प डंडी वाले पान के पत्ते पर रख कर अर्पित करें।

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इसके बाद पुरानी मूर्तियों पर भी रोली तिलक कर पुष्प, मिष्ठान, खील बतासे अर्पित कर, फिर श्री गणेश जी एवं माता लक्ष्मी जी की विभिन्न प्रकार से स्तुति कर आरती करें।  दौज को पुरानी मूर्तियों को श्रद्धा पूर्वक प्रणाम कर उनके स्थान पर नए श्री गणेश जी एवं माता श्री लक्ष्मी जी को बैठाएं और पुरानी मूर्तियों को किसी अखबार अथवा पेपर में लपेट कर सुरक्षित रख दें और जब आपको मौका मिले  तब किसी साफ स्थान पर विसर्जित कर दें। भूल से भी पुरानी मूर्तियों को इधर उधर न रखें अथवा गंदे पानी अथवा स्थान पर फेकें, यदि आप ऐसा करते तो आपकी वर्षभर की गई पूजा तो निष्फल होगी, जिससे घर में विभिन्न प्रकार की परेशानियां आएंगी एवं दरिद्रता का वास आपके घर में हो जायेगा।