खाने पर इन तरीको से फर्जी GST वसूल रहे हैं होटल और रेस्टोरेंट, कहीं आप भी तो नहीं हुए शिकार

Fake GST Charge On Food : अधिकांश लोग, जो बाहर जाकर खाना खाने के शौकीन होते हैं, वो खाना खाते हैं, बिल पे करते हैं और चले जाते हैं। कुछ लोग तो सिर्फ बिल का अमाउंट देखते हैं और कुछ नहीं, ये आदत आपको बड़े घाटे में डाल सकती है। कुछ होटल या रेस्टॉरेंट ऐसे होते हैं जो आपसे जीएसटी चार्ज कर लेते हैं,लेकिन इस कैटेगरी में वो आते भी नहीं है. इसलिए ये जानना जरूरी है कि आपने किस मद में कितना बिल पे किया है औऱ कहीं आपसे ज्यादा अमाउंट तो नहीं ले लिया गया।

कैसे वसूल रहे फर्जी जीएसटी

कुछ रेस्टॉरेंट या होटल्स अपने ग्राहकों से फर्जी तरीके से जीएसटी वसूल करते हैं, इसके लिए उनके पास तीन अलग अलग तरीके हैं. जिसके जरिए कस्टमर को गुमराह किया जाता है।

पहला तरीका- बिल पर कहीं ये नहीं लिखा जाता कि वो जीएसटी बिल है, जबकि ग्राहकों से जीएसटी वसूल लिया जाता है।
दूसरा तरीका- जीएसटी चार्ज तो मेंशन करते हैं, लेकिन नंबर नहीं, हो सकता है उनका जीएसटी नंबर एक्टिव ही न हो।
तीसरा तरीका- हो सकता है उस होटल या रेस्टोरेंट के पास जीएसटी नंबर हो, वो एक्टिव भी हो लेकिन जीएसटी के दायरे में वो आता ही न हो।इनमें से किसी भी तरीका के अंदेशा होने पर आप जीएसटी बिल की जांच करवा सकते है।

ऐसे करें शिकायत

आपको अगर लगता है कि आप तीन में से किसी भी तरीके का शिकार हो रहे हैं तो आप जीएसटी चार्ज देने से इंकार कर सकते हैं। इसके साथ ही शिकायत भी दर्ज करवा सकते हैं। इसके लिए आप जीएसटी का हेल्पलाइन नंबर लगा सकते हैं। ये नंबर है 18001200232। जिस पर कॉल कर आप आसानी से शिकायत दर्ज करवा सकते हैं, इसके बाद होटल या रेस्टॉरेंट पर कार्रवाई हो सकती है।

कितना लगता है जीएसटी

रेस्टोरेंट और होटल अपनी कैटेगरी के अनुसार जीएसटी बिल चार्ज करते हैं। आमतौर पर ग्राहकों से खाने पीने की चीजों पर पांच प्रतिशत तक जीएसटी लिया जाता है। कुछ जगह ये चार्ज 12 तो कुछ जगह 18 फीसदी तक है, ये काफी हद तक रेस्टॉरेंट और होटल की क्वालिटी और लग्जरी पर भी निर्भर करता है।


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Pooja Khodani

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खबर वह होती है जिसे कोई दबाना चाहता है। बाकी सब विज्ञापन है। मकसद तय करना दम की बात है। मायने यह रखता है कि हम क्या छापते हैं और क्या नहीं छापते। "कलम भी हूँ और कलमकार भी हूँ। खबरों के छपने का आधार भी हूँ।। मैं इस व्यवस्था की भागीदार भी हूँ। इसे बदलने की एक तलबगार भी हूँ।। दिवानी ही नहीं हूँ, दिमागदार भी हूँ। झूठे पर प्रहार, सच्चे की यार भी हूं।।" (पत्रकारिता में 8 वर्षों से सक्रिय, इलेक्ट्रानिक से लेकर डिजिटल मीडिया तक का अनुभव, सीखने की लालसा के साथ राजनैतिक खबरों पर पैनी नजर)

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