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हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, कर्मचारी-शिक्षक 60 वर्ष की उम्र में होंगे सेवानिवृत्त, रिटायरमेंट उम्र पर बड़ी अपडेट

Written by:Kashish Trivedi
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हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, कर्मचारी-शिक्षक 60 वर्ष की उम्र में होंगे सेवानिवृत्त, रिटायरमेंट उम्र पर बड़ी अपडेट

चंडीगढ़, डेस्क रिपोर्ट। एक तरफ जहां देश में कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाए जाने को लेकर कई मांगो विचार देखे जा रहे हैं। वहीँ दूसरी तरफ हाईकोर्ट ने सेवानिवृत्ति आयु  (retirement age) को लेकर महत्वपूर्ण फैसला दिया है। जिसके तहत 6th pay commission कर्मचारी-प्रोफेसर 60 वर्ष की उम्र में सेवानिवृत्त होंगे। इसके लिए हाईकोर्ट ने सिंगल बेंच के आदेश पर लगी रोक को हटा लिया है।

दरअसल 60 वर्ष की आयु पूरी करते ही चंडीगढ़ की पंजाब यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर को सेवानिवृत्ति करने के सिंगल बेंच के आदेश पर लगी रोक को हाईकोर्ट की खंडपीठ ने हटा लिया है। इसके साथ ही 60 की उम्र के बाद सेवा देने की आस लगाए बैठे प्रोफेसर को बड़ा झटका लगा है। वहीं आदेश मिलते ही विश्वविद्यालय द्वारा 58 प्रोफेसर को सेवा मुक्त करने के आदेश जारी कर दिए गए हैं।

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इससे पहले 2014 में प्रोफेसर द्वारा सेवानिवृत्ति आयु 60 से बढ़ाकर 65 करने की मांग की गई थी। हालांकि पंजाब और केंद्र सरकार द्वारा इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया गया था। मामले में केंद्र सरकार ने अदालत में दलील पेश करते हुए कहा था कि पंजाब यूनिवर्सिटी केंद्रीय विश्वविद्यालय नहीं है। इसलिए इसमें यह नियम लागू नहीं किया जा सकता। जिसके बाद प्रोफ़ेसर हाई कोर्ट पहुंचे थे और सिंगल बेंच के समक्ष याचिका दायर की थी। याचिका को खारिज कर दिया गया था। वहीं 60 वर्ष की आयु पूरी कर चुके प्रोफेसर को तत्काल सेवानिवृत्त करने के आदेश दिए गए थे। सिंगल बेंच के फैसले पर शिक्षकों द्वारा खंडपीठ ने मामले को चुनौती दी गई थी।

खंडपीठ के आदेश पर प्रोफेसर को दोबारा सेवा में रखने और वेतन जारी करने के भी आदेश जारी किए गए थे। हालांकि खंडपीठ ने अपने ही आदेश को हटाते हुए कहा है कि रोक को जारी रखने का कोई औचित्य नहीं है। साथ ही हाईकोर्ट ने शिक्षकों से किसी प्रकार की रिकवरी नहीं करने के आदेश जारी किए हैं। इससे पहले सेवानिवृत्ति आयु में 5 साल के विस्तार की अनुमति देने वाले 2016 के स्थगन आदेश को रद्द करने से पूर्व पंजाब के शिक्षकों को हाईकोर्ट के आदेश के तहत वेतन संरक्षण और अन्य सुविधाओं के साथ 5 साल का विस्तार भी दिया गया था। जिसके बाद 65 वर्ष तक शिक्षक सेवा में रहने की पात्रता रख रहे थे।

वही खंडपीठ ने कहा कि सितंबर 2016 में स्थगन पारित किया गया था। यह देखते हुए कि चल रहे शैक्षणिक सत्र के बीच विश्वविद्यालय को संकाय की भारी कमी का सामना करना पड़ेगा। वही अब इस मामले में सुनवाई 2023 के जनवरी से शुरू होगी अंतरिम आदेश को जारी रखते हुए अदालत ने कहा है कि जनवरी 2023 में मामले की सुनवाई के लिए इसे स्वीकार किया जाता है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में सेवानिवृत्त शिक्षकों की अपील की अनुमति दी जाती है।

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