पेंशन योजना में संशोधन की तैयारी, कैबिनेट ने दी मंजूरी, पेंशनर्स को मिलेगा लाभ

इस निर्णय से 1 जनवरी 2004 और उसके बाद नियुक्त सरकारी कर्मचारी सेवानिवृत्ति पर पेंशन लाभ के पात्र होंगे।

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जयपुर, डेस्क रिपोर्ट। राजस्थान मंत्रिमंडल (Rajasthan Cabinet) ने पुरानी पेंशन योजना (old pension scheme) को लागू करने, इसमें संशोधन सहित कई भर्ती परीक्षाओं को एक समान पात्रता परीक्षा से बदलने और कुछ पदों के लिए साक्षात्कार (interview) के प्रावधान को समाप्त करने के लिए नियमों में आवश्यक संशोधनों को मंजूरी दे दी। जिसके बाद 1 जनवरी 2004 और उसके बाद नियुक्त सभी सरकारी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बजट (budget) घोषणा के कार्यान्वयन के लिए नियमों में आवश्यक संशोधनों को मंजूरी दी गई।

इससे पहले पुराणी पेंशन योजना की घोषणा और इसके कार्यान्वयन के क्रम में राजस्थान सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1996, राजस्थान सिविल सेवा (अंशदायी पेंशन) नियम, 2005, विभिन्न संशोधित वेतनमान नियम और राजस्थान सिविल सेवा (चिकित्सा उपस्थिति) नियम, में विभिन्न संशोधनों का प्रस्ताव, 2013 को मंजूरी दी थी। इस निर्णय से 1 जनवरी 2004 और उसके बाद नियुक्त सरकारी कर्मचारी सेवानिवृत्ति पर पेंशन लाभ के पात्र होंगे। इसके साथ ही वे राजस्थान सरकार स्वास्थ्य योजना के तहत कैशलेस चिकित्सा सुविधा भी प्राप्त कर सकेंगे।

सेवानिवृत्ति के बाद कर्मचारियों को सुनिश्चित आय प्रदान करने के लिए इस वित्तीय वर्ष से पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने के लिए राजस्थान सरकार का कदम खराब मौसम में चला गया है, केंद्र ने बाजार संचालित राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) 2004 के तहत अर्जित 39,000 करोड़ रूपए वापस लेने के राज्य के अनुरोध को खारिज कर दिया है। साथ ही पेंशन कोष नियामक एवं विकास प्राधिकरण (PFRDA) ने कांग्रेस सरकार की राजस्थान सरकार और कर्मचारियों के योगदान से अर्जित धन को वापस लेने की मांग को खारिज कर दिया है।

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इससे इस निर्णय ने राज्य में 300,000-350,000 सरकारी कर्मचारियों को प्रभावित किया, जिससे गहलोत सरकार को नवंबर 2023 के लिए होने वाले चुनावों से पहले मतदाताओं के एक वर्ग को संबोधित करने की अनुमति मिली। 21 अप्रैल को राजस्थान सरकार ने पीएफआरडीए को पत्र लिखकर अपने निर्णय से अवगत कराया। पुरानी पेंशन योजना और उसने मार्च और अप्रैल में कर्मचारियों के वेतन से योगदान नहीं काटा। वहीँ यह अनुरोध किया गया था कि धन, जो पहले से ही सरकार के रूप में दोनों के रूप में अर्जित किया गया है इसे वापस किया जाये। जिसे PFRDA ने ख़ारिज कर दिया था।

मंत्रि-परिषद ने निर्णय लिया कि भर्ती प्रक्रिया को सरल एवं एकीकृत करने तथा समयबद्ध तरीके से संचालित करने की दृष्टि से विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे ग्राम विकास अधिकारी, पटवारी, मंत्री कर्मचारी आदि) के स्थान पर एक समान पात्रता परीक्षा आयोजित की जायेगी। इसके लिए नियम बनाए जाएंगे। वहीँ सामान्य पात्रता परीक्षा के साथ, उम्मीदवारों को विभिन्न पदों पर भर्ती के लिए परीक्षा में शामिल होने, आवेदन शुल्क और यात्रा व्यय के लिए बार-बार आवेदन नहीं करना होगा।