World Environment Day पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने की महत्वपूर्ण घोषणा

सीएम शिवराज ने लोगों से अपील की है कि अधिक से अधिक संख्या में अंकुर अभियान से जुड़ें और पौधे लगाएं। प्रतिभागियों का जिले वार चयन कर वृक्ष वीरों और वीरांगनाओं को सम्मानित किया जाएगा।

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। 5 जून विश्व पर्यावरण दिवस (World Environment Day) के मौके पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (shivraj singh chauhan) ने मध्यप्रदेश में बड़ी घोषणा की है। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर अंकुर अभियान (ankur abhiyaan) का शुभारंभ करते हुए सीएम शिवराज (cm shivraj) ने पौधारोपण किया। इसके साथ ही महत्वपूर्ण व्यक्तियों से उन्होंने चर्चा की। बिल्डिंग परमिशन के साथ पेड़ पौधे लगाने की अनिवार्यता की जाएगी। वहीँ मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य होगा, जहां बिल्डिंग परमिशन के लिए पेड़ लगाना अनिवार्य किया जाएगा।

सीएम शिवराज ने लोगों से अपील की है कि अधिक से अधिक संख्या में अंकुर अभियान से जुड़ें और पौधे लगाएं। सीएम शिवराज ने घोषणा की है कि प्रतिभागियों का जिले वार चयन कर वृक्ष वीरों और वीरांगनाओं को सम्मानित किया जाएगा। राज्य में अब बिल्डिंग परमिशन के साथ पेड़ पौधे लगाने की अनिवार्यता की जाएगी।

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मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मैंने रोज एक पेड़ लगाने का निश्चय किया। पौधा लगाते समय मैं महसूस करता हूँ कि मैं जीवन रोप रहा हूँ। पेड़ स्थाई ऑक्सीजन (oxygen) के प्लांट हैं। एक वृक्ष लाखों जीव जंतुओं को जीवन देता है। पेड़ हमें शांति का अनुभव देते हैं, हमें आने वाली पीढ़ी के लिये पेड़ लगाने होंगे। मैं आप सबसे आह्वान करता हूँ कि वर्ष में एक पेड़ अवश्य लगाएं और उसका संरक्षण करें। जन्मदिन आदि शुभ अवसरों पर एक पेड़ लगा सकते हैं। पेड़ लगाकर स्मृति स्थाई करने से अच्छा और क्या तरीका क्या हो सकता है। अंकुर कार्यक्रम हमने इसी उद्देश्य से शुरू किया है।

सीएम शिवराज ने कहा कि आज पर्यावरण दिवस है। भौतिक प्रगति के लिए जिस तरह से प्रकृति के साथ खिलवाड़ हुआ है। वो गलत है। यही स्थिति पृथ्वी का तापमान 2 डिग्री तक बढ़ेगा। इसके साथ ही सीएम शिवराज ने कहा कि जो अनेकों आपदाओं को जन्म देगा। हम क्या इतने स्वार्थी हो गए हैं कि आने वाली पीढ़ी के लिये ऐसे धरती छोड़ेंगे।

सीएम शिवराज ने कहा कि यह धरती केवल मनुष्य के लिये नहीं बनाई है। यह सब जीव-जंतुओं के लिये है, अनेकों समस्याएं केवल पर्यावरण के असंतुलन से पैदा हुई हैं। पेड़ कटे-जंगल कटे, जिसका दुष्परिणाम आज सबके सामने है।  प्रकृति का दोहन करना है, शोषण नहीं है। दोनों में बहुत अंतर है, प्रकृति से इतना ही लेना है कि जितना वो फिर से भरपाई कर ले। बचपन से हमे सिखाया गया है कि हम प्रकृति का सम्मान करें। हमें पर्यावरण संतुलित करना है तो पेड़ लगाने होंगे, नदियों को बचाना होगा।