भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। मध्यप्रदेश (madhya pradesh) में कोरोना (corona) संक्रमण की गंभीरता को देखते हुए माध्यमिक शिक्षा मंडल (Board of Secondary Education) ने दसवीं की परीक्षा निरस्त कर दिए। इसके साथ ही साथ सभी स्कूलों को परीक्षा परिणाम तैयार करने के निर्देश दे दिए गए हैं। वही दसवीं के परीक्षा परिणाम रीविजन टेस्ट, प्री बोर्ड के आधार पर तैयार किए जाने के निर्देश दिए गए हैं।

इतना ही नहीं सभी स्कूलों को इस बात के निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी स्कूल के परिणाम 3 साल के औसत परिणाम से 2 फीसद से अधिक नहीं होनी चाहिए। अब ऐसी स्थिति में दसवीं की परीक्षा परिणाम तैयार करने वाले शिक्षकों के लिए समस्या खड़ी हो गई है। इस मामले में शिक्षक संगठनों का कहना है कि माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा तय किए गए मानक के आधार पर दसवीं के मुख्य परीक्षा का परीक्षा परिणाम तैयार करना कठिन चुनौती है। शिक्षक संगठन का कहना है कि माध्यमिक शिक्षा मंडल ने जो मानक तय की है। उसके मुताबिक पिछले साल की तुलना में इस साल की परीक्षा परिणाम औसत रहेंगे।

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इतना ही नहीं शिक्षक संगठन ने कहा है कि माध्यमिक शिक्षा मंडलद्वारा स्कूलों को 30 मई तक दसवीं के परीक्षा परिणाम तैयार करने के आदेश जारी किए गए हैं। परीक्षा परिणाम के अंकों का मूल्यांकन आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर किया जाएगा। जबकि कई ऐसे ही स्कूल है। जहां आंतरिक मूल्यांकन हुआ ही नहीं है। अब ऐसी स्थिति में आंतरिक मूल्यांकन के अंक शिक्षक अपने मन से देंगे या इसके लिए कोई नियम यह मानक तय किए जाएंगे। यह अभी भी तय नहीं है। इतना ही नहीं शिक्षकों की समस्या यह भी है कि औसत अंक मिलने की वजह से कई ऐसे विद्यार्थी जो तीक्ष्ण बुद्धि और तेज प्रवृत्ति के हैं। वह औसत की गणना के बराबर आ जाएंगे और ऐसे उनके अंक भी औसत ही प्रविष्ट किए जायेंगे।

वही प्राचार्य कल्याण संघ मध्य प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष मुकेश शर्मा ने कहा है कि दसवीं के परीक्षा परिणाम की तैयारी करने की प्रक्रिया एक औपचारिकता है लेकिन परीक्षा परिणाम तैयार करने में समय पर्याप्त नहीं दिया गया है। कोरोना काल में बहुत से शिक्षक और प्राचार्य संक्रमित हैं। इसलिए 30 मई तक की अवधि को बढ़ाकर 10 जून तक किया जाना चाहिए। इसके बाद इतना तो तय है कि मध्य प्रदेश 10वीं बोर्ड परीक्षा के परीक्षा परिणाम विद्यार्थियों को जून के आखिरी सप्ताह या जुलाई के पहले सप्ताह में उपलब्ध हो पाएंगे।