विश्व टाइगर दिवस पर शेरा की दहाड़, कमलनाथ के सामने ठोका दावा

जब बीजेपी ने ऑपरेशन लोटस (operation lotus) शुरू किया तब भी शेरा पर भी डोरे डाले गए।

भोपाल, हरप्रीत रीन। 2018 में BJP की कद्दावर नेता अर्चना चिटनिस (Archana Chitnis) को शिकस्त देकर निर्दलीय विधानसभा पहुंचे सुरेंद्र सिंह उर्फ शेरा भैया (shera bhaiya) के तेवर तीखे हैं। अब तक भाजपा को समर्थन दे रहे शेरा ने अपनी पत्नी को खंडवा लोकसभा उपचुनाव का सबसे उपयुक्त प्रत्याशी बताते हुए दावेदारी पेश की है।

BJP की कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री अर्चना चिटनिस को 5000 के लगभग वोटों से शिकस्त देकर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में विधानसभा पहुंचने वाले सुरेंद्र सिंह शेरा (surendra singh shera) अब किसी परिचय के मोहताज नहीं है। एक समय था जब कमलनाथ (kamalnath)  की सरकार की सरकार शेरा और उनके जैसे तीन अन्य निर्दलीय विधायकों व सपा बसपा विधायकों की बैसाखी पर चल रही थी। जब बीजेपी ने ऑपरेशन लोटस (operation lotus) शुरू किया तब भी शेरा पर भी डोरे डाले गए।

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उन्हें मंत्री बनाए जाने का प्रलोभन दिया गया। लेकिन इन सबसे परे शेरा ने बीजेपी को समर्थन आत्मा की आवाज पर देने की बात कह कर आलोचकों के मुंह शांत कर दिए। 2019 के लोकसभा चुनाव में भी खंडवा लोकसभा सीट से शेरा अपनी पत्नी जयश्री को कांग्रेस से टिकट दिए जाने का पुरजोर प्रयास कर चुके हैं।टिकट न मिलने पर उन्होंने उनका निर्दलीय के रूप में फॉर्म तक भरवा दिया था लेकिन बाद में पार्टी आलाकमान के कहने पर शेरा ने अपने कदम पीछे खींच लिए। लेकिन न तो कांग्रेस और न बीजेपी दोनों ने ही शेरा के साथ किए वायदे को निभाया और शेरा विधायक के विधायक ही रहे

नंदकुमार चौहान (nandkumar singh chauhan) के असामयिक निधन के चलते खंडवा में लोकसभा का उपचुनाव होना है और इस बार फिर शेरा ने कमलनाथ के सामने पत्नी को टिकट दिए जाने का दावा ठोक दिया है। उन्होंने कमलनाथ से साफ कह दिया है कि वे भी सर्वे करा कर देख लें और यदि जयश्री उस पर खरी उतरती हैं तो फिर वे उन्हें टिकट जरूर दें। शेरा के इस दावे में दम है।

दरअसल शेरा और उनके परिवार का अंचल में अच्छा खासा प्रभाव है। दो भाई ठाकुर शिवकुमार सिंह, महेंद्र सिंह सासंद रहे। एक भाई ने तो भाजपा के कद्दावर नेता कुशाभाऊ ठाकरे को हराया था, लोगों के दिलों में आज भी इस परिवार के लिए बेहद सम्मान है और शेरा के दावे की वजह भी यही है।लेकिन इससे एक बात और साफ है कि शेरा का भाजपा से मोहभंग हो चुका है।