आगामी चुनावों से पहले शिवराज सरकार ने खेला बड़ा मास्टर स्ट्रोक, क्या मिलेगा फायदा?

पेसा कानून को लाने का उद्देश्य आदिवासी बहुल क्षेत्रों में स्व-शासन को मजबूती देना है। पेसा एक्ट 24 अप्रैल 1996 को बनाया गया था और कई राज्यों में यह लागू है।

शिवराज सरकार

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। आगामी चुनावों से पहले मध्य प्रदेश बीजेपी और शिवराज सरकार  (Shivraj Government) की तैयारियों जोरों पर चल रही है। शिवराज सरकार हर वर्ग को साधने के लिए एक के बाद एक घोषणाएं और ऐलान कर रही है और केंद्रीय मंत्रियों के दौरे भी लगातार हो रहे है। इसी बीच अब मुख्यमंत्री ने आदिवासियों को साधने के लिए बड़ा मास्टर स्ट्रोक चला है। शिवराज सिंह चौहान ने ऐलान किया है कि एमपी में ‘पेसा एक्ट  चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।हालांकि कि यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा कि यह दांव बीजेपी के लिए कितना फायदेमंद साबित होता है और इसे लागू करने में बीजेपी कितनी तेजी दिखाती है।

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दरअसल, शनिवार को जबलपुर में गैरीसन ग्राउंड में आयोजित अमर शहीद शंकर शाह एवं कुंवर रघुनाथ शाह के बलिदान दिवस  के मौके पर सीएम शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) ने ऐलान करते हुए कहा था कि मध्य प्रदेश की सरकार एक ऐतिहासिक फैसला कर रही है। पेसा एक्ट (PESA ACT) चरणबद्ध तरीके से जनजातीय भाई-बहनों के लिए मध्य प्रदेश की धरती पर लागू किया जाएगा। उसमें बाकी जातियों के निवासियों के अधिकारों को संरक्षित रखा जाएगा।पेसा ग्राम सभाओं का गठन किया जायेगा, जो इनके विकास के लिए योजनाएं बना सकेंगी।

सीएम शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि वन प्रबंधन समितियाँ कार्ययोजना के अनुसार हर साल का सूक्ष्म योजना बनाएंगी और उसे ग्राम सभा से अनुमोदित कराएँगी। उनका कहना था कि समितियाँ ही उस प्लान को क्रियान्वित करेंगी तथा वन विभाग का अमला समितियों को इस काम में मदद करेगा तथा आवश्यक वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराएगा। वही प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा (VD SHARMA) ने इसके लिए मुख्यमंत्री को धन्यवाद दिया है और कहा है कि वे जमीनी स्तर पर इसके लिए काम करेंगे।वही इस फैसले पर कांग्रेस हमलावर हो चली है। कांग्रेस का दावा है कि यह एक्ट तो पहले से ही मध्य प्रदेश में लागू है।

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बता दे कि पिछले चुनावों में आदिवासी प्रभाव रखने वाली विधानसभा सीटों पर बीजेपी को बड़ी हार का सामना करना पड़ा था। 2018  के चुनावों में आदिवासियों के रुठने से बीजेपी वोट छिटक गया था और शिवराज सरकार सत्ता के सिंहासन से दूर हो गई थी, लेकिन अब बीजेपी यह गलती नही दोहराना चाहती है, इसके लिए अब मिशन 2023 की तैयारियों मे जुट गई है और आदिवासियों को मनाने के लिए नए नए दांव खेल रही है। वर्तमान में मध्य प्रदेश में करीब 80 से ज्यादा सीटों पर आदिवासियों का प्रभाव है, ऐसे में अभी से बीजेपी और शिवराज सरकार ने इस वर्ग को साधने के लिए मास्टर स्ट्रोक खेलना शुरु कर दिए है, हालांकि इसमें कितना कामयाब होती है ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा।

क्या है पेसा एक्ट

पेसा कानून को लाने का उद्देश्य आदिवासी बहुल क्षेत्रों में स्व-शासन को मजबूती देना है। पेसा एक्ट 24 अप्रैल 1996 को बनाया गया था और कई राज्यों में यह लागू है। देश के 10 राज्यों में यह कानून लागू है लेकिन छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश और ओडिशा में यह पूरी तरह से लागू नहीं है। इसके तहत जनजातीय ग्राम सभाओं को भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास के काम में अनिवार्य परामर्श की शक्ति दी गई है। खदानों और खनिजों के लाइसेंस/पट्टा देने के लिए ग्राम सभा को सिफारिशें देने का अधिकार दिया गया है।अब मध्य प्रदेश सरकार ने इस कानून को राज्य में पूरी तरह से लागू करने का ऐलान कर आदिवासियों को बड़ी सौगात दी है।

पेसा एक्ट का ऐसे मिलेगा लाभ

  • पेसा एक्ट के तहत स्थानीय संसाधनों पर स्थानीय अनुसूचित जाति, जनजाति के लोगों की समिति को अधिकार दिए जाएंगे।
  • अनुसूचित जाति और जनजाति वाली ग्राम पंचायतों को सामुदायिक संसाधन जैसे जमीन, खनिज संपदा, लघु वनोपज की सुरक्षा और संरक्षण का अधिकार मिल जाएगा।
  • पेसा एक्ट लागू होने के बाद सामुदायिक वन प्रबंधन समितियां वर्किंग प्लान के अनुसार, हर साल माइक्रो प्लान बनाएंगे और उसे ग्राम सभा से अनुमोदित कराएंगे।
  • सामुदायिक वन प्रबंधन समिति का गठन भी ग्राम सभा द्वारा किया जाएगा।
  • पेसा कानून के तहत ग्राम सभाओं को आदिवासी समाज की परंपराओं, रीति रिवाज, सांस्कृतिक पहचान, समुदाय के संसाधन और विवाद समाधान के लिए परंपरागत तरीकों के इस्तेमाल के लिए सक्षम बनाया जाएगा।
  • राज्य में तेंदूपत्ता बेचने का काम भी वन समिति करेगी।