लोकायुक्त संगठनों को मिली बड़ी राहत, आय से अधिक संपत्ति जांच में हाईकोर्ट ने दिए बड़े निर्देश

आय से अधिक संपत्ति के प्रकरण में प्यारे प्रथम और द्वितीय श्रेणी के अधिकारियों की अभियोजन स्वीकृति और खातमें का अधिकार लोकायुक्त को था

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भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। मध्य प्रदेश (MP) में लोकायुक्त संगठनों (Lokayukta Organisations) को बड़ी राहत दी गई है। दरअसल हाई कोर्ट (High court) ने सुनवाई के दौरान लोकायुक्त संगठन को आय से अधिक संपत्ति जांच मामले में लोकायुक्त द्वारा संस्थापित जांच जारी रखने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। जिसकी सुनवाई के दौरान लोकायुक्त संगठनों के पक्ष में फैसला सुनाया गया है। इस मामले में अगली सुनवाई 17 जनवरी को निर्धारित हुई है।

बता दे तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के आय से अधिक संपत्ति की स्वीकृति और खातमें से जुड़े मामले में लोकायुक्त द्वारा स्थापित जांच जारी रखने के निर्देश दिए। वहीं हाईकोर्ट ने पिछली सुनवाई के दौरान इस पर रोक लगा दी थी। मामले में मुख्य न्यायाधीश रवि मलिमथ व न्यायमूर्ति पुरेशेन्द्र कुमार कौरव ने लोकायुक्त संगठन को आगामी सुनवाई तक जांच जारी रखने की अनुमति दी है। इससे पहले लोकायुक्त की ओर से अधिवक्ता अभिजीत अवस्थी द्वारा अंतरिम आवेदन प्रस्तुत करने की मांग की गई थी।

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आय से अधिक संपत्ति के प्रकरण में प्यारे प्रथम और द्वितीय श्रेणी के अधिकारियों की अभियोजन स्वीकृति और खातमें का अधिकार लोकायुक्त को था जबकि तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के मामले में यह कार्रवाई DG लोकायुक्त प्राधिकृत अधिकारी करते थे। लोकायुक्त को इस बात की शिकायत मिली कि कई ऐसे मामले हैं। जहां आय से अधिक संपत्ति के 643% से भी अधिक है। वहीं विशेष पुलिस द्वारा कई केसों में खातमें लगा दिए गए हैं। जिसके बाद 11 अक्टूबर को इस मामले में एक परिपत्र जारी कर दिया गया था।

इस परिपत्र में कहा गया था कि तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के टेप और आय से अधिक संपत्ति के खात्मा रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत करने से पहले लोकायुक्त की स्वीकृति लेने अनिवार्य होगी। हाईकोर्ट में इस परिपत्र को चुनौती देते हुए याचिका दायर की गई थी। जिसके बाद हाईकोर्ट ने इस मामले में 17 जनवरी को रोक लगा दी थी। अब हाईकोर्ट द्वारा इस मामले में लोकायुक्त संगठनों का कोई अधिकार देते हुए बड़ा लाभ दिया गया है।