मंत्रिमंडल विस्तार- दिवाली बाद तुलसी और गोविंद बनेंगे मंत्री, बाकियों के मंत्री बनने की उम्मीद कम

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। उपचुनाव के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (cm shivraj singh chauhan) के सामने मंत्रिमंडल विस्तार (cabinet expansion) करना एक बड़ी चुनौती मानी जा रही है। क्योंकि पिछली बार मंत्रिमंडल विस्तार में सीएम शिवराज के करीबी कई विधायक मंत्री नहीं बन पाए थे, जो अब फिर से मंत्री पद की उम्मीद में हैं। उपचुनाव (By-election) में भारी मतों से जीते पूर्व मंत्री तुलसीराम सिलावट (tulsi silawat) और गोविंद सिंह राजपूत (govind singh rajput) का जल्द मंत्री बनना तय माना जा रहा है। उम्मीद है कि दिवाली के बाद मुख्यमंत्री दोनों को फिर से मंत्री बना सकते हैं। दोनों मंत्रियों के विभागों में बदलाव की संभावना भी कम है।

मध्य प्रदेश विधानसभा उपचुनाव में फतह हासिल करने वाली शिवराज सरकार के सामने अगली बड़ी चुनौती मंत्रीमंडल में शामिल होने वाले नेताओं को संतुष्ट करने की होगी। चुनाव में परचम लहराने वाले पार्टी नेताओं ने अब मंत्रीमंडल में जगह पाने के लिए कवायद शुरू कर दी हैं। यूं तो फिलहाल 4 मंत्री बनाये जाने की जगह खाली है लेकिन दावेदारों की संख्या दो गुना तक पहुंच चुकी है।

दावेदार हुए सक्रिय
इधर मंत्रिमंडल विस्तार की सुगबुगाहट शुरू होते ही दावेदार फिर सक्रिय हो गए हैं। इसमें विंध्य के नेताओं की संख्या ज्यादा है। सिंधिया समर्थक तुलसी सिलावट और गोविंद सिंह शिवराज सरकार के कैबिनेट में मंत्री थे, पर विधायक ना रहने के कारण 6 महीने पूरे होते ही उन्हें अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। उपचुनाव जीतने के बाद उन्हें फिर से मंत्री बनाया जाएगा।

और विधायकों को मंत्री बनाए जाने की संभावना कम
गौरतलब है कि शिवराज सरकार के तीन मंत्री इमरती देवी, एदल सिंह कंसाना और गिरिराज दंडोतिया चुनाव हार गए हैं। इनकी जगह किसी मंत्री बनाया जाएगा यह अभी तय नहीं है। संगठन सूत्रों की मानें तो फिलहाल गोविंद सिंह राजपूत, तुलसी सिलावट के अलावा किसी और को मंत्री बनाए जाने की संभावना नहीं है। कारण साफ है कि इस बार सिंधिया समर्थकों के कारण कई सीनियर विधायक मंत्री बनने से वंचित रह गए हैं। ऐसे में एक अनार सौ बीमार की स्थिति है। लिहाजा मंत्रियों की संख्या बढ़ाने के मामले को संगठन अभी टालना चाहता है।

ये हैं कतार में
मंत्री बनने वालों की कतार में राजेंद्र शुक्ला, रामपाल सिंह, अजय विश्नोई, गौरीशंकर बिसेन, संजय पाठक, रमेश मेंदोला समेत एक दर्जन नेता शामिल है। इसमें से अधिकांश ने उपचुनाव में पूरी मेहनत से काम किया और पार्टी के उम्मीदवारों को विजयी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। डॉ प्रभुराम चौधरी को सांची से ऐतिहासिक विजय दिलाने में पूर्व मंत्री रामपाल सिंह, सांवेर से तुलसी सिलावट को विजय दिलाने में रमेश मेंदोला, अनूपपुर से मंत्री बिसाहूलाल को विजय दिलाने में राजेंद्र शुक्ला व ग्वालियर में प्रद्युमन सिंह तोमर को विजय दिलाने में अजय विश्नोई की मेहनत व प्रबंध का बड़ा योगदान रहा।

विंध्य की उपेक्षा का आरोप
विंध्य से भाजपा विधायक गिरीश गौतम का कहना है कि मंत्रिमंडल में विंध्य क्षेत्र की उपेक्षा हो रही है। उन्होंने कहा कि मंत्रिमंडल विस्तार में विंध्य को भी प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। क्योंकि भाजपा के सबसे अधिक विधायक विंध्य से जीत कर आए हैं। गौरतलब है कि गौतम लगातार चौथी बार के विधायक हैं और मंत्री पद के दावेदार भी हैं।

विधानसभा अध्यक्ष पद पर भी कई दावेदार
उपचुनाव के नतीजे आने के बाद अब विधानसभा अध्यक्ष का चयन भी सीएम शिवराज के लिए बड़ी चुनौती हो सकती है। फिलहाल रामेश्वर शर्मा प्रोटेम स्पीकर के तौर पर यह जिम्मेदारी निभा रहे हैं। इस पद के लिए पिछली बार विधानसभा अध्यक्ष रहे सीतासरन शर्मा और विंध्य अंचल से आने वाले केदार शुक्ला का दावा मजबूत माना जा रहा है। जबकि यशपाल सिसोदिया और गिरीश गौतम के लिए भी यह जिम्मेदारी मिल सकते हैं। इसके अलावा अजय विश्नोई के नाम की चर्चा भी विधानसभा अध्यक्ष के लिए पहले भी चलती रही है। जिससे उनके नाम पर भी मुहर लग सकती है।