IMPACT: CDS बिपिन रावत के साले का मामला, कलेक्टर करेंगे तथ्यों की जांच, सड़क निर्माण रोका

जब वे दिल्ली में स्व.बिपिन रावत और अपनी बहन की अंतिम यात्रा में थे तब उनके पास रोड बनाने वाली कंपनी के मैनेजर का फोन आया कि उनकी शेष जमीन पर भी सड़क निर्माण शुरू हो गया है।

भोपाल,डेस्क रिपोर्ट। मध्य प्रदेश में एमपी ब्रेकिंग न्यूज की खबर का एक बार फिर बड़ा असर हुआ है। सीडीएस बिपिन रावत (CDS Bipin Rawat) के साले यशवर्धन सिंह के मामले की खबर एमपी ब्रेकिंग न्यूज़ (MP Breaking News) पर आने के बाद शहडोल संभाग आयुक्त राजीव शर्मा ने शहडोल कलेक्टर को सारी तथ्यो की जांच करने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही सड़क का निर्माण कार्य रोक दिया गया है। आज सुबह इस मामले में यशोवर्धन रावत ने पोस्ट किया था और आरोप लगाए थे।

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दरअसल, आज सुबह चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ स्वर्गीय बिपिन रावत के साले और स्वर्गीय मधुलिका रावत के भाई यशोवर्धन रावत ने एक पोस्ट किया था, जिसमें उन्होंने लिखा था कि “जिस दिन जीजाजी जनरल बिपिन रावत और जीजी मधुलिका रावत का अग्नि संस्कार किया जा रहा था उसी वक्त मौके का फायदा उठाते हुए भारत सरकार (Government Of India) के आदेश अनुसार शहडोल मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) स्थित हमारे निज निवास के परिसर से बिना भूमि अधिग्रहण किए अवैध रूप से समाधियो को नष्ट कर पेड़ों को काटकर नेशनल हाईवे का निर्माण किया जा रहा है।इसके साथ ही हमारे किसी हस्तक्षेप पर स्थानीय पुलिस को भी हमारे खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया गया है। न्याय की दरकार”

इस पर गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा (Home Minister Narottam Mishra) ने ट्वीट कर लिखा है कि यशोवर्धन जी की सोशल मीडिया पर की गई पोस्ट मेरे संज्ञान में आई है। मैंने इस विषय में एसपी शहडोल (SP Shahdol) से बातचीत कर निर्देश दिए हैं कि पूरा मामला मेरी जानकारी में लाए बिना पुलिस किसी भी तरह का कोई कदम उनके या उनके परिवार के खिलाफ नहीं उठाए।अगर पुलिस द्वारा किसी भी तरह का पूर्वाग्रह इस मामले में बरता गया है और किसी भी तरह की अवैधानिक कार्यवाही को प्रश्रय दिया है तो मैं खुद पूरे मामले को देखूंगा और जो भी दोषी होगा उस पर कड़ी कार्रवाई होगी।

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2015 में नेशनल हाईवे क्रमांक 43 कटनी से झारखंड के गुमला तक जो रोड बननी थी, वह रोड यशोवर्धन सिंह के सुहागपुर स्थित निवास के कैंपस से होकर निकल रही थी। इसका मुआवजा निर्धारण 2015 में हो चुका था लेकिन सड़क का निर्माण 2020 में शुरू हुआ। इसमें यशोवर्धन सिंह के पिता मृगेन्द्र सिंह जी और उनकी पत्नी सरला सिंह के नाम से मुआवजा हुआ। मुआवजे का अंश भी परिवार को मिल गया। पेड़ों का अंश नहीं दिया गया जबकि वे रातों-रात खेल काट दिये गए थे। वर्तमान कलेक्टर वंदना वैद्य ने यशवर्धन सिंह और उनकी पत्नी को बुलाकर सड़क निर्माण न होने देने का कारण पूछा।

यशवर्धन सिंह के अनुसार वे किसी भी तरह की बाधा उत्पन्न नहीं कर रहे हैं। केवल बात इतनी है कि जितनी जमीन अधिग्रहण की गई है रउस पूरी जमीन का मुआवजा नहीं मिला है। इस पर कलेक्टर ने जब जमीन की नपती करवाई तो यशोवर्धन का दावा सही निकला और शेष मुआवजा देने का वादा भी प्रशासन ने कर दिया। लेकिन इस बीच जनरल बिपिन रावत और उनकी पत्नी का हेलीकॉप्टर हादसे में निधन हो गया और यशोवर्धन दिल्ली चले गए। जब वे दिल्ली में स्व.बिपिन रावत और अपनी बहन की अंतिम यात्रा में थे तब उनके पास रोड बनाने वाली कंपनी के मैनेजर का फोन आया कि उनकी शेष जमीन पर भी सड़क निर्माण शुरू हो गया है और प्रशासन ने साफ तौर पर कहा है कि यदि यशोवर्धन या उनके परिवार का कोई भी व्यक्ति इस में बाधा डाले तो पुलिस उस पर सख्त कार्रवाई करेगी।