Congress-BJP-have-no-ground-plan-to-fulfill-poll-promises-for-cities-

भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस और भाजपा का घोषणा पत्र जारी हो चुका है। दोनों ही पार्टियों ने जनता को लोक लुभावने सपने दिखाए हैं। कांग्रेस किसानोंं के कर्ज माफी की बड़ी घोषणा कर चुकी है। वहीं, भाजपा ने भी पुरानी योजनाओं को रंग रोगन कर जनता के सामने पेश किया है। भाजपा ने महिलाओं को ध्यान में रखते हुए अलग से घोषणा पत्र जारी किया है। प्रदेश की 38 फीसदी जनता शहरों में रहती है। लेकिन जब बात मतदान की आती है तो यह दूसरे नंबर पर आते हैं। बीजेपी शहरी क्षेत्रोंं से जीत हासिल करती रही है। इस बार लोगों को खुश करने के लिए पार्टी ने प्रदेश में 378 शहर बनाने का वादा किया है। जानकारों ने दोनों पार्टियों के घोषणा पत्र की समीक्षा करने के बाद इनपर सवाल उठाए हैं। 

क्या कहना है जानकारों का

टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के पूर्व एडिशनल डायरेक्टर वर्षा नावलेकर का मानना है कि दोनों ही दलों ने जनता को बड़े बड़े ख्वाब दिखाए हैं। लेकिन दोनों ही दल इस बात से अंजान है कि इन वादों को धरातल पर उतारा कैसे जाए। बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही दलों के पास अपनी योजनाओं के लिए कोई पुख्ता रणनीति नहीं है। टाउन प्लानर प्रवीण भागवत ने कहा कि दोनों ही पार्टियों के पास अपने वादे पूरा करने के लिए कोई ठोस रणनीति नहीं है। 

जानकारों ने उठाए ये सवाल

-भाजपा शहरों का विकास कैसे करेगी अगर वह अपनी योजनाओं को दोहराती रहेगी जैसे स्मार्ट सिटी। अमृत हाउसिंग योजना को सरकार ने अभी तक लागू नहीं किया। जब सरकार में रहते हुए उनके पास इनता वक्त था तब इन योजानओं को क्योंं लागू नहीं किय गया?

– शहरों का चहुमुखी विकास करने और भाजपा की योजनाओं से अलग कांग्रेस क्या करेगी इस सवाल पर कांग्रेस ने क्यों खामोशी साध रखी है? कांग्रेस सिर्फ शहरों से कारीडोर हटाने और अवारा मवेशियों को सही जगह पहुंचाने और सिर्फ पार्किंग माफिया तक सीमित है? प्रदेश का इंफ्रास्ट्रक्चर को बनाने और मास्टर प्लान का खाका पेश करने के बजाए वह सिर्फ उसकी बात क्यो कर रही है? 

– शहरों में जल आपूर्ती के लिए सरकार ने 800 करोड़ रुपए खर्च किए हैं, लेकिन उसके बाद भी शहरों में लोगों के घरों में पानी 24 घंटे उपलब्ध करवाने में भाजपा कामयाब नहीं हुआ है, भाजपा बताए कैसे वह इस समस्या का निदान करेगी? इसको दूर करने के लिए नई योजना लाई जाने पर क्या यह समझ लिया जाए पूर्व में 800 करोड़ व्यर्थ गए?