IFS मामला सरकार के लिये बना सिरदर्द, वन कर्मचारी संघ ने खोला मोर्चा

corrupt-officers-free-in-government-not-give-permission-for-action-

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। बैतूल मे रिश्वत मांगने का ऑडियो वायरल होने के बाद सुर्खियों में आए IFS अधिकारी मोहन लाल मीणा पर नाम मात्र की कार्रवाई करना सरकार के लिए मुसीबत बन गया है। अब इस मामले में वन कर्मचारी संघ भी खुलकर मीणा के विरोध में सामने आ गया है और सरकार से कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहा है।

डबरा में शराब बनाने की फैक्टरी पर पुलिस की दबिश, एक आरोपी सहित 16 लाख की शराब जब्त

बैतूल जिले के सीपीएफ IFS मोहन लाल मीणा का पिछले दिनों ऑडियो वायरल हुआ था जिसमें वह बेटे की पढ़ाई के नाम पर एक रेंजर से कुछ पैसे अपने खाते में डालने की मांग कर रहे थे। ऑडियो वायरल होने के बाद वन विभाग ने एक टीम इस बात की जांच के लिए गठित की जिसने बैतूल जाकर इस घटना को सही पाया। इसके बाद मीणा के तीन ऑडियो और वायरल हुए जिनमें वे रिश्वत की मांग कर रहे थे। इसके साथ ही छह महिला कर्मचारियों ने भी मीणा के ऊपर महिला कर्मचारियों के साथ उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए गंभीर शिकायत की थी। जांच रिपोर्ट तो वन विभाग के आला अधिकारियों पर पहुंच गई लेकिन मीणा पर कार्रवाई के नाम पर उन्हें केवल भोपाल वन विभाग मुख्यालय अटैच कर दिया गया। वन कर्मचारी संघ इस मामले में सरकार पर ऐसे अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग कर रहा है।

वन कर्मचारी संघ होशंगाबाद के संरक्षक मधुकर चतुर्वेदी ने इस संबंध में वन विभाग के अपर मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल को एक पत्र लिखा है और पत्र में उन्होंने नैतिक पतन वाले प्रदेश के IFS अधिकारियों का निलंबन और बर्खास्त करने की कार्रवाई करने की मांग की है। मधुकर चतुर्वेदी ने अपने पत्र में लिखा है कि मोहन लाल मीणा को केवल हटाना उचित कार्रवाई नहीं है बल्कि उन्हें निलंबित किया जाना चाहिए। उन्होंने एक अन्य अधिकारी अजय कुमार पांडे जो होशंगाबाद के डीएओ थे, उनका हवाला दिया है और कहा है कि 17 लाख रुपए के घोटाले में आरोप सत्य पाने के बावजूद भी उन्हें निलंबित नहीं किया गया जो इस बात का प्रमाण है कि विभाग बजाए भ्रष्टाचार को खत्म करने की उसकी जड़ों को और मजबूत कर रहा है। यह पहला मौका नहीं जब किसी IFS अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार के इतने महत्वपूर्ण सबूत मिले हो लेकिन इस लॉबी का इस कदर दबदबा है कि बजाय कार्रवाई करने के हर बार मामले को दबा दिया जाता है जिसके चलते भ्रष्टाचार की जड़ें और ज्यादा मजबूत होती जाती हैं।