सांसदों और विधायकों के लंबित मामलों में जबलपुर हाईकोर्ट ने दिए ये निर्देश

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जबलपुर, संदीप कुमार। जबलपुर हाईकोर्ट (Jabalpur High Court) में मंगलवार को सांसदों और विधायकों (MPs and MLAs) के खिलाफ आपराधिक मुकदमों के निपटारे के मामले में सुनवाई हुई।इस दौरान कोर्ट ने प्रोग्रेस रिपोर्ट मांगी गई, लेकिन ये रिपोर्ट हाईकोर्ट के रिकॉर्ड में शामिल नहीं हुई लिहाजा अब 15 जनवरी (January) को इस मामले की सुनवाई होगी।

दरअसल, मंगलवार को जबलपुर हाई कोर्ट में वीआईपी मामलों से जुड़ी सुमोटो याचिका पर सुनवाई हुई, जिसमें केसों के निपटारे की प्रोग्रेस रिपोर्ट (Progress Report) मांगी गई थी जो कि 14 तारीख को जमा की गई, लेकिन ये हाई कोर्ट के रिकॉर्ड में शामिल नहीं हुई, जिसकी वजह से सुनवाई 15 दिसंबर (December) के लिए बढ़ा दी गई है।चीफ जस्टिस संजय यादव और जस्टिस सुजय पॉल की डिवीजन बैंच ने स्टेटस रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर लेने का निर्देश दिया है।

वीआईपी मामलों की सुनवाई
विधायकों और सांसदों के खिलाफ मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) में अभी भी 192 मामले विचाराधीन हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इन मामलों की तुरंत सुनवाई कर खत्म करने का आदेश हाई कोर्ट को दिए थे, इसी आदेश के बाद हाई कोर्ट ने एक सुमोटो याचिका दायर की। भोपाल (Bhopal) में विधायकों और सांसदों के मामलों की त्वरित निपटारे के लिए एक स्पेशल अदालत शुरू की गई, जिसमें लगातार सुनवाई चल रही है, लेकिन अभी भी 192 मामले विचाराधीन हैं जिस पर सुनवाई चल रही है।

कई मामले विचाराधीन

लगभग 192 मामले अभी भी विचाराधीन हैं। इनमें सबसे ज्यादा मामले पूर्व मंत्री सुरेंद्र पटवा (Former Minister Surendra Patwa) के खिलाफ हैं, जिसमें चेक बाउंस (Check Bounce) के केस हैं। वहीं पूर्व मंत्री सुरेंद्र पटवा के वकील का कहना है कि, जल्द ही सुरेंद्र पटवा की एक संपत्ति का निपटारा होने वाला है। इसके बाद चेक बाउंस के तमाम मामलों में पैसा वापस कर दिया जाएगा अंतिम बहस वाले मामलों में जल्द निपटारा होगा

27 मामले अंतिम बहस के लिए रखे
इसमें 27 मामले अंतिम बहस के लिए रखे गए हैं। अगर बहस पूरी हो जाती है, तो इन पर जल्द ही कोर्ट निपटारा भी कर देगी, जिस तरीके से यह सुनवाई चल रही है, उससे ऐसा लग रहा है कि जल्द ही यह वीआईपी केस खत्म हो जाएंगे। जिस तरीके से स्पेशल कोर्ट (Special Court) ने काम किया है और वीआईपी मामलों को खत्म करने की कोशिश की है। अगर इसी तरह से दूसरे मामलों में भी त्वरित सुनवाई की जाए, तो सालों से अदालतों का चक्कर काटने वाले लोगों को भी निजात मिल जाएगा।

गौरतलब है कि 16 सितंबर 2020 को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने देश के सभी राज्यों के मुख्य न्यायाधीशों (Chief judges) को आदेश दिया था कि वर्तमान और पूर्व सांसदों और विधायकों के लंबित मामलों की सुनवाई जल्द से जल्द पूरी की जाए, जिसके बाद हाईकोर्ट ने जनहित याचिका के रूप में सुनवाई शुरू की है।