खुशखबरी- केन्द्र की इस योजना में शामिल हो सकता है MP, किसानों को मिलेगा लाभ

मुख्यमंत्री  चौहान ने फसल अवशेषों के इन-सीटू प्रबंधन के लिए कृषि यांत्रिकीकरण को बढ़ावा देने की योजना में मध्यप्रदेश को शामिल किये जाने की माँग की।

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भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। देश में चल रहे किसान आंदोलन (Farmers Protest) के बीच मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chauha) ने केन्द्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर (Narendra Singh Tomar) से रबी 2020-21 (Rabi 2020-21) के लिए चना, मसूर और सरसों के उपार्जन (Rabi Crops Procurement)की सीमा को बढ़ाने, यूरिया (Urea) उपलब्ध कराने और फसल अवशेषों के इन-सीटू प्रबंधन के लिए कृषि (Agriculture) यांत्रिकीकरण को बढ़ावा देने की योजना में मध्यप्रदेश (MP) को शामिल किये जाने की माँग की। इस पर मंत्री तोमर ने आश्वासन दिया है।

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दरअसल, आज मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने केन्द्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर से मुलाकात कर कृषि एवं किसान-कल्याण से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। मुख्यमंत्री चौहान ने रबी 2020-21 के लिए चना, मसूर और सरसों के उपार्जन की सीमा को बढ़ाने का की मांग। उन्होंने बताया कि अन्य वर्षों की तरह इस वर्ष भी अच्छी फसल होने से चना, सरसों और मसूर के उत्पादन में काफी बढ़ोत्तरी होने की संभावना है।

मुख्यमंत्री  चौहान ने बताया कि इस वर्ष चने का संभावित उत्पादन 58.06 लाख मीट्रिक टन है और प्राइस सपोर्ट स्कीम के अंतर्गत प्रदेश को रबी 2020-21 में चना उपार्जन के लिए अधिकतम सीमा 14.51 लाख मीट्रिक टन की पात्रता है। इसी प्रकार सरसों का संभावित उत्पादन 15.60 लाख मीट्रिक टन है और प्राइस सपोर्ट स्कीम में अधिकतम सीमा नौ लाख मीट्रिक टन की पात्रता है। इसी प्रकार मसूर का उत्पादन इस वर्ष 5 लाख 48 हजार मीट्रिक टन होने की संभावना है।

यूरिया को बढाया जाए

मुख्यमंत्री चौहान ने केन्द्रीय मंत्री को बताया कि खरीफ 2020-21 के लिए 15 लाख मीट्रिक टन यूरिया की अधिक माँग की गई थी किन्तु केन्द्र सरकार (Central Government) ने अभी तक केवल 12.50 लाख मीट्रिक टन यूरिया उपलब्ध कराने की सहमति प्रदान की है। वही शेष ढाई लाख मीट्रिक टन यूरिया शीघ्र जारी करवाने और खरीफ 2020-21 के लिए DAP की अतिरिक्त माँग की। उन्होंने बताया कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में डी.ए.पी. उत्पादन की कीमतों में लगातार वृद्धि हो रही है। खरीफ 2020-21 के लिए अभी के आकलन के हिसाब 11 लाख मीट्रिक टन डी.ए.पी. की आवश्यकता है।

इन योजना में शामिल करने की मांग

मुख्यमंत्री  चौहान ने फसल अवशेषों के इन-सीटू प्रबंधन के लिए कृषि यांत्रिकीकरण को बढ़ावा देने की योजना में मध्यप्रदेश को शामिल किये जाने की माँग की। वर्तमान में चार राज्यों पंजाब (Panjab), हरियाणा, उत्तर प्रदेश(UP) तथा दिल्ली (Delhi0 में फसल अवशेष प्रबंधन की विशेष योजना का संचालन भारत सरकार (Indian Government) द्वारा किया जा रहा है। इसके अंतर्गत किसानों (Farmers) को नई तकनीक की कृषि मशीनरी 80 प्रतिशत अनुदान पर उपलब्ध करवायी जा रही है। उन्होंने मांग कि इस योजना को मध्यप्रदेश (MP) में भी शुरू किया जाय। ज्ञात हो कि मध्यप्रदेश में वर्ष 2020 में नरवाई जलाने की घटनाओं में काफी वृद्धि हुई है।