किसानों के लिए शिवराज सरकार का बड़ा फैसला, बड़े स्तर पर मिलेगा लाभ

इस प्रक्रिया के तहत समिति स्तर पर उपलब्ध खाद का अधिकतम 20% हिस्सा आरक्षित किया जाएगा।

शिवराज सरकार

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। मध्यप्रदेश (madhya pardesh) में यूरिया (urea) की कमी से किसानों (farmer) को निजात दिलाने के लिए शिवराज सरकार (shivraj government) एक नई पहल कर रही है। इस नवीन पहल के तहत किसान पहले से ही यूरिया की अग्रिम बुकिंग (advance booking) करवा सकेंगे। इस प्रक्रिया के तहत किसानों को वेबसाइट पर जाकर आवेदन करना होगा। जिसके बाद किसानों की मांग का परीक्षण किया जाएगा। वहीं परीक्षण के बाद पात्रता रखने वाले किसानों को यूरिया उपलब्ध कराई जाएगी।

मध्य प्रदेश सहकारिता विभाग (cooperative Department) किसानों को यूरिया उपलब्ध कराने की दिशा में एक बड़ा काम किया है। ऐसा करने वाला मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है। प्रक्रिया के तहत किसान को राज्य सहकारी विपणन संघ की वेबसाइट पर यूरिया के लिए आवेदन करना होगा। इसके बाद किसानों के परीक्षण में पात्रता सही होने पर उन्हें यूरिया बुकिंग की सूचना एसएमएस (sms) के जरिए की जाएगी। खरीफ सीजन की शुरूआत से प्रदेश में यह प्रक्रिया लागू हो जाएगी।

इस मामले में सहकारिता विभाग के प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव का कहना है कि खाद बिक्री व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए और किसानों को सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में यह कदम उठाया जा रहा है। इस प्रक्रिया के तहत समिति स्तर पर उपलब्ध खाद का अधिकतम 20% हिस्सा आरक्षित किया जाएगा।

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किसान अपनी जरूरत के हिसाब से खाद की मांग कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें आवेदन देना होगा। किसान को बताना होगा उसे कौन सी कंपनी की कौन सी खाद चाहिए। ऐसी स्थिति में उसके आवेदन की जांच उसके किसान क्रेडिट कार्ड से की जाएगी। वहीं पात्रता रखने वाले किसानों को एसएमएस के जरिए जानकारी दी जाएगी। इसके बाद किसानों को अधिकतम 7 दिन का समय मिलेगा। 7 दिन के अंदर किसानों को खाद उठाने होंगे।

बता दें कि प्रदेश में कुल 28 लाख टन यूरिया की जरूरत हर साल होती है। ऐसे में किसानों को समय पर खाद उपलब्ध हो सके। इसके साथ ही फसलों को नुकसान ना हो। इस दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। जिसके बाद अब किसानों को यूरिया की अग्रिम बुकिंग सुविधा दी जा रही है। इससे पहले सहकारी समितियां किसानों के एवज में खाद की मांग करती थी जिसे सरकारी बैंकों के माध्यम से लाया जाता था। अब किसान खुद ही वेबसाइट पर अपनी जानकारी भरकर खाद आरक्षित कर सकते हैं।

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