मध्यप्रदेश में कर्मचारियों के साथ शिवराज सरकार का यह कैसा दोहरा रवैया!

खास बात ये है कि सरकार के इस फैसले से प्रत्येक कर्मचारी को 3 साल में 2.50 लाख रुपए का नुकसान झेलना पड़ेगा इतना ही नही वह अपने सेवाकाल में 2019 में भर्ती हुए कर्मचारी की बराबरी भी नहीं कर पाएगा।

कर्मचारी

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) में सरकारी कर्मचारियों (Government Employees) की 30 प्रतिशत वेतन कटौती में दोहरा रवैया अपनाया गया है। शिवराज सरकार (Shivraj Sarkar) द्वारा छोटे कर्मचारियों की वेतन में कटौती कर बचत की गई है, लेकिन पीएसी (PSC) और एमपीपीएससी(MPPSC) के कर्मचारियों को पूरा भुगतान किया गया है। फरवरी 2020 से अबतक 500 करोड़ बचाए गए है, जिसके चलते कर्मचारियों को आक्रोश और नाराजगी है।

दरअसल, सत्ता में आने के बाद प्रदेश की शिवराज सरकार ने कोरोना संकट (Corona Crisis) का हवाला देते हुए कर्मचारियों की सैलरी में 30 प्रतिशत की कटौती का फैसला लिया था। जिसके तहत नई भर्ती वाले कर्मचारियों को पहले साल में 70 फीसदी, दूसरे साल में 80 फीसदी, तीसरे साल में 90 फीसदी और चौथे साल में 100 फीसदी यानी पूरा वेतन मिलेगा।इसी के तहत 2020 फरवरी के बाद भर्ती हुए 5000 कर्मचारियों की 30 फीसदी सेलरी कट सरकार ने 500 करोड़ की बचत की है। इसमें सीधी भर्ती और अनुकंपा से भर्ती हुए 5000 तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों शामिल है, जबकी अखिल भारतीय सेवा और राज्य प्रशासनिक सेवा के अफसरों की नई भर्तियों (New Recruitment) को इससे बाहर रखा गया है और प्रोबेशनरी पीरिएड (Probationary Period) में भी 100 फीसदी भुगतान किया गया।

राज्य सरकार के इस दोहरे रवैए के कारण कर्मचारियों में नाराजगी है।कर्मचारियों का कहना है कि आखिर उनके साथ ही ऐसा क्यों? सरकार को अखिल भारतीय सेवा(All India Service) और राज्य प्रशासनिक सेवा (State Administrative Service) से भर्ती होने वाले अफसरों पर भी कर्मचारियों का फार्मूला लागू होना चाहिए।

खास बात ये है कि सरकार के इस फैसले से प्रत्येक कर्मचारी को 3 साल में 2.50 लाख रुपए का नुकसान झेलना पड़ेगा इतना ही नही वह अपने सेवाकाल में 2019 में भर्ती हुए कर्मचारी की बराबरी भी नहीं कर पाएगा।