Cabinet Meeting : शिवराज कैबिनेट बैठक संपन्न, इन प्रस्तावों को मिली मंजूरी

कैबिनेट बैठक में केन्द्र प्रवर्तित योजना प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उन्नयन योजना (PMFME) को वर्ष 2020-21 से 2024-25 तक के लिए राशि 500 करोड़ रूपये के प्रावधान के साथ क्रियान्वित करने की स्वीकृति दी।

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भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान Shivraj Singh Chauhan) की अध्यक्षता में आज मंगलवार (Tuesday) 12 जनवरी को कैबिनेट बैठक (Cabinet Meeting) सम्पन्न हुई। बैठक में एक दर्जन प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। मध्य प्रदेश ‘ग्रामीण ऋण मुक्ति विधेयक-2020’ तथा केंद्र प्रवर्तित ‘प्रधान मंत्री सूक्ष्म खाद्य उन्नयन योजना’ सहित अन्य प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।खास बात ये रही कि आज 10 महीने बाद वर्चुअल बैठक न करके मंत्रालय में कैबिनेट की बैठक बुलाई है।

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मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि ‘मध्य प्रदेश ग्रामीण ऋण मुक्ति विधेयक-2020’ ऐसे सूदखोर साहूकारों के चंगुल से जनता को मुक्त करेगा, जो बिना वैध लाइसेंस के मनमानी दरों पर ऋण देते और वसूलते हैं। इसके द्वारा 15 अगस्त 2020 तक लिए गए सभी अवैध ऋण शून्य हो जाएंगे। अनुसूचित जनजाति ऋण मुक्ति विधेयक के माध्यम से अनुसूचित क्षेत्रों में रहने वाले जनजातीय भाई-बहनों को इस प्रकार के अवैध ऋणों से पहले ही मुक्त कराया गया है।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मध्य प्रदेश ग्रामीण ऋण मुक्ति विधेयक-2020 में वैध लाइसेंस धारी साहूकार द्वारा शासन की निर्धारित दरों पर ऋण देने पर कोई प्रतिबंध नहीं रहेगा। वे नियमानुसार ऋण देकर उसकी वसूली कर सकेंगे। साथ ही ऐसे किसान जो मजदूरों को अग्रिम/ऋण देते हैं, उन पर भी कोई बंधन नहीं रहेगा। केंद्र प्रवर्तित प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उन्नयन योजना मध्य प्रदेश में खाद्य प्र-संस्करण की अधोसंरचना तैयार करने में उपयोगी होगी। इसमें केंद्र तथा राज्य का अंश 60 एवं 40 होगा। इसके अंतर्गत प्रयोगशाला, वेयरहाउस, इनक्यूबेशन सेंटर, कोल्ड स्टोर्स आदि बनाए जाने पर कृषि उत्पादक समूह, स्व-सहायता समूह, सहकारी समितियों आदि को 35% क्रेडिट लिंकेज प्रदान की जाएगी।

शिवराज कैबिनेट बैठक में इन प्रस्तावों को मिली मंजूरी

  • मंत्रि-परिषद ने मध्यप्रदेश ग्रामीण (सीमान्त व छोटे किसान तथा भूमिहीन कृषि श्रमिक ) ऋण विमुक्ति विधेयक 2020 (Madhya Pradesh Rural Debt Release Bill 2020) के संबंध में संविधान के अनुच्छेद 304(बी) के परन्तुक के अनुसरण में विधेयक को विधान सभा में पुर: स्थापित करने के पहले राष्ट्रपति (President) की अनुमति प्राप्त एवं विधान सभा से पारित कराने की सभी कार्यवाही के लिए राजस्व विभाग (Revenue Department) को अधिकृत किया ।
  • पूर्व में मध्यप्रदेश अनुसूचित जनजाति ऋण विमुक्ति अधिनियम 2020 (Madhya Pradesh Scheduled Tribes Debt Release Act 2020) के अंतर्गत राज्य के अनुसूचित क्षेत्रों में निवासरत मध्यप्रदेश की अनुसूचित जनजातियों के सदस्यों को ऋण ग्रस्तता से राहत के लिए उपबंध किये गये हैं। मध्यप्रदेश ग्रामीण (सीमान्त व छोटे किसान तथा भूमिहीन कृषि श्रमिक ) ऋण विमुक्ति विधेयक 2020 में भी समान प्रकार के उपबंध है जो विधेयक में प्रस्तावित किये गए है।
  • ग्रामीण क्षेत्रों के भूमिहीन कृषि श्रमिकों, सीमान्त किसानों तथा छोटे किसानों (राज्य के अनुसूचित क्षेत्रों में निवासरत मध्यप्रदेश की अनुसूचित जनजातियों के सदस्यों को छोड़कर) को, नियमों व प्रक्रिया के विरूद्व तथा अत्यन्त ऊँची ब्याज दरों पर दिये गये ऋण की समस्या का निरंतर सामना करना पड़ रहा है।
  • इसका परिणाम ऐसे व्यक्तियों की वित्तीय हानि, मानसिक प्रताड़ना तथा शोषण के रूप में निकलता है। ऐसे भूमिहीन कृषि श्रमिकों, सीमान्त किसानों तथा छोटे किसानों (Farmers) को 15 अगस्त 2020 तक उन्हें दिए गए कतिपय ऋणों, जिनमें ब्याज की राशि शामिल है, के उन्मोचन द्वारा राहत देने के लिए मध्यप्रदेश ग्रामीण (सीमान्त व छोटे किसान तथा भूमिहीन कृषि श्रमिक) ऋण विमुक्ति विधेयक,2020 प्रस्तावित किया गया है।
  • बैठक में केन्द्र प्रवर्तित योजना प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उन्नयन योजना(Prime Minister Micro Food Upgradation Scheme) को वर्ष 2020-21 से 2024-25 तक के लिए राशि 500 करोड़ रूपये के प्रावधान के साथ क्रियान्वित करने की स्वीकृति दी।
  • इसमें परियोजना स्वीकृति के लिए कलेक्टर (Collector) की अध्यक्षता में प्रस्तावों की अनुशंसा के लिए जिला स्तरीय समिति बनाई गई है।
  • 10 लाख रूपये तक की अनुदान सहायता वाले प्रोजेक्ट के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय अनुमोदन समिति रहेगी।
  • अर्न्तविभागीय मंत्री सक्षम समूह 10 लाख रूपये से अधिक की स्वीकृति दे सकेगा।
  • यह योजना कलस्टर एप्रोच के साथ ‘एक जिला एक उत्पाद’ पर आधारित है।
  • निजी इकाइयों को 35 प्रतिशत अधिकतम 10 लाख क्रेडिट लिंक अनुदान मिलेगा। एफ.पी.ओ./एस.एच.जी./कॉपरेटिव को पूंजी निवेश, प्रशिक्षण एवं विपणन पर 35 प्रतिशत क्रेडिट लिंक अनुदान (न्यूनतम टर्नओवर 1 करोड़ ) रहेगा।
  • एस.एच.जी. को सीड केपिटल 40 हजार प्रति सदस्य दी जायगी। ब्रांडिंग एवं मार्केटिंग में सहायता दी जायेगी।

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