MP Politics : उमा भारती का बड़ा बयान, कांग्रेस बोली-एक बार फिर सच्चाई उगल दी

उमा ने कहा कि इस देश में संविधान के तहत हर हिन्दू को गीता कुरान बाइबिल, मंदिर-मस्जिद जाकर माथा टेकने का अधिकार है। हमारे देश में धर्मांतरण की जरुरत नही।

uma bharti

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। एक तरफ प्रदेश (Madhya Pradesh) की शिवराज सरकार लव जिहाद को रोकने के लिए फ्रीडम ऑफ रिलिजन एक्ट 2020 (Freedom of Religion Act 2020) कानून लागू करने जा रही है वही दूसरी तरफ पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी (BJP) की फायर ब्रांड नेत्री उमा भारती (Uma Bharti) ने इस पर बड़ा बयान देकर सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। उमा का कहना है कि भारत को धर्मांतरण (Proselytization) की जरुरत नही।

दरअसल, शुक्रवार को उमा सतना (Satna) के मैहर के बड़ा आखाड़ा स्थित गणेश मंदिर दर्शन करने पहुंची थी।जहां लव जिहाद पर पूछे गए सवाल पर उमा ने कहा कि इस देश में संविधान के तहत हर हिन्दू को गीता कुरान बाइबिल, मंदिर-मस्जिद जाकर माथा टेकने का अधिकार है। हमारे देश में धर्मांतरण की जरुरत नही।यहां हिन्दुओं को हक है वे गीता, कुरान, बाइबिल पढ़ सकते है, मंदिर के साथ मस्जिद भी जा सकते है।भारत को धर्मांतरण की जरुरत ही नही।

कांग्रेस ने जताया आभार
कांग्रेस नेता केके मिश्रा (KK Mishra) ने उमा भारती की बात का समर्थन किया है और उन्हें इसके लिए आभार व्यक्त किया है। मिश्रा ने ट्वीट (Tweet) कर लिखा है कि राजनीति में बेबाकी व अदम्य साहस की पहचान आदरणीया उमा भारती जी ने राजनैतिक आधार पर बनाये जा रहे धर्मांतरण जैसे कानून की जरूरत नहीं होने की बात कह,एक बार फिर सच्चाई उगल दी है,बधाई-आभार-धन्यवाद

सरकार का ड्राफ्ट तैयार, कांग्रेस को आपत्ति
लव जिहाद (Love jihad) पर कानून बनाने को लेकर गृह विभाग ने ड्राफ्ट (draft) तैयार कर लिया है, जिसमें धर्मांतरण कराने वालो के खिलाफ 10 साल की सजा का प्रावधान किया गया है जिस पर कांग्रेस (congress) पहले ही आपत्ति जता चुकी है। कांग्रेस का कहना है कि सरकार ने लव जिहाद पर कानून बनाने के लिए नया ड्राफ्ट वाहवाही के लिए तैयार किया है क्योंकि शिवराज सरकार (shivraj government) को 1968 में बने पुराने कानून को खत्म करना पड़ेगा। अगर ऐसा नहीं होता है तो सरकार पुराने कानून में ही संशोधन कर सकती है। कांग्रेस की लीगल सेल (congress legal cell) ने आपत्ति जताते हुए कहा है कि जिस विधेयक की बात शिवराज सरकार अपने नए ड्राफ्ट में कर रही है। वह विधेयक 1968 के दौरान तैयार किया गया है। कांग्रेस के लीगल सेल का सवाल है कि 1968 के बने इस कानून में अब तक कितने केस दर्ज किए गए हैं और कितने आरोपी इस मामले में सजा के पात्र हुए हैं। बीजेपी को इन सब विषयों पर अपने डेटा पेश करना चाहिए।