Mental Health Tips: इमेजिनेशन मेंटल हेल्थ को करता है प्रभावित, जानें इसके लक्षण

आज के आर्टिकल में हम आपको डे-ड्रीमिंग के लक्षण बताएंगे, जिसे जानना आपके लिए बेहद जरूरी है। अगर आप में भी ऐसा कोई लक्षण दिखाई देता है, तो फौरन उसे सुधारने की कोशिश करें।

Mental Health Tips : आजकल भाग दौड़ भरी जिंदगी में मानसिक रूप से स्वस्थ रहना बहुत बड़ा चैलेंजिंग काम है, क्योंकि दिन भर की थकान, प्रोफेशनल और पर्सनल लाइफ की टेंशन इंसान के जीवन को अस्त-व्यस्त करके रख देती है। ऐसे में बहुत से लोग ऐसे होते हैं, जो अक्सर चीजों को इमेजिन करने लगते हैं। चाहे वह उनका पसंदीदा इंसान हो या फिर पसंदीदा खाना हो, वह घर पर हो या फिर ऑफिस अक्सर ख्यालों में खोए रहते हैं। सीधे शब्दों में कहे तो खुली आंखों से सपना देखना मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। दरअसल, जब हम जागते हुए ख्वाबों की दुनिया में होते हैं तो हम अपनी असली जिंदगी से दूर होते चले जाते हैं। दिन-प्रतिदिन हमें शांत माहौल, अकेलापन, आदि पसंद आने लगता है। ऐसे में वह धीरे-धीरे स्ट्रेस, एंजायटी का भी शिकार हो जाते हैं। साइंटिफिक लैंग्वेज में इसे डे-ड्रीमिंग कहते हैं और हिंदी में इस दिवा स्वप्न कहते हैं। इसकी व्याख्या करें तो यह मन को सुकून तो जरूर पहुंचाता हैं, लेकिन इसके साथ ही यह मानसिक तनाव को बढ़ा देता है। इससे अंदर-ही-अंदर इंसान बेचैन होने लगता है। तो चलिए आज के आर्टिकल में हम आपको डे-ड्रीमिंग के लक्षण बताएंगे, जिसे जानना आपके लिए बेहद जरूरी है। अगर आप में भी ऐसा कोई लक्षण दिखाई देता है, तो फौरन उसे सुधारने की कोशिश करें। आइए जानते हैं विस्तार से…

Mental Health Tips: इमेजिनेशन मेंटल हेल्थ को करता है प्रभावित, जानें इसके लक्षण

लक्षण

  • ज्यादा समय ख्यालों में खोए रहना और आवश्यक कार्यों को नजरअंदाज करना दिवास्वप्न का प्रमुख लक्षण होता है। जब एक व्यक्ति अपने सोच और विचारों में इतना डूब जाता है कि वह अपने आसपास के कार्यों पर ध्यान नहीं दे पाता, तो वह दिवास्वप्न के चपेट में हो सकता है। इसके परिणामस्वरूप, उनका काम और प्रोजेक्ट्स प्रभावित हो सकता है। साथ ही इससे मानसिक तनाव भी बढ़ता है।
  • ख्यालों पर कंट्रोल करना मुश्किल होना भी दिवास्वप्न के लक्षणों में से एक है। इसमें व्यक्ति अपने विचारों और ख्यालों को नियंत्रित नहीं कर पाता, इसलिए उन्हें परेशानी भी होती है। वे बिजी लाइफस्टाइल में भीड़ और शोर के बावजूद अपने मन की गहराई में खोये रहते हैं। इससे उनका जीवनशैली प्रभावित होता है।
  • बता दें कि डे-ड्रीमिंग की वजह से तनाव और हानि भी झेलना पड़ता है। दरअसल, जब व्यक्ति अपने विचारों में डूबा रहता है, तो वह अपने कार्यों में ध्यान नहीं दे पाता, जिस कारण उन्हें कार्यों को पूरा करने में परेशानी होती है। इससे उन्हें समय पर काम करने में दिक्कतें हो सकती हैं, जो उन्हें तनाव में डाल सकती हैं।
  • बहुत मुश्किलों के बाद भी डे-ड्रीमिंग को नहीं रोक पाना बहुत गंभीर समस्या बन सकता है। क्योंकि जब इंसान अपने ख्यालों में डूबे रहते हैं, तो वह उसे नियंत्रित करने में असक्षम हो जाता है जोकि मानसिक तनाव का बड़ा कारण माना जाता है।

नुकसान

  • लंबे समय तक ख्यालों में डूबे रहने से व्यक्ति अकेलेपन और असंतोष की भावना महसूस होने लगता है। यह उन्हें जीवन में खुद को अलग महसूस करने का कारण बनता है।
  • डे-ड्रीमिंग से उत्पादकता में कमी हो सकती है, क्योंकि व्यक्ति का मन ख्यालों में होता है और कार्यों पर ध्यान नहीं दिया जाता। इससे उनका मन भटक जाता है।
  • लंबे समय तक डे-ड्रीमिंग से व्यक्ति को चिंता, अवसाद, डिप्रेशन और अन्य मानसिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

(Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। MP Breaking News किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।)


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Sanjucta Pandit

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मैं संयुक्ता पंडित वर्ष 2022 से MP Breaking में बतौर सीनियर कंटेंट राइटर काम कर रही हूँ। डिप्लोमा इन मास कम्युनिकेशन और बीए की पढ़ाई करने के बाद से ही मुझे पत्रकार बनना था। जिसके लिए मैं लगातार मध्य प्रदेश की ऑनलाइन वेब साइट्स लाइव इंडिया, VIP News Channel, Khabar Bharat में काम किया है।पत्रकारिता लोकतंत्र का अघोषित चौथा स्तंभ माना जाता है। जिसका मुख्य काम है लोगों की बात को सरकार तक पहुंचाना। इसलिए मैं पिछले 5 सालों से इस क्षेत्र में कार्य कर रही हुं।