चीन की विस्तारवादी नीति बरकरार, भारत के बाद अब नेपाल की जमीन हड़पने के चक्कर में ड्रैगन

हिमालय की श्रृंखला होने के कारण नेपाल की सीमा की वास्तविक स्थिति पता नहीं चल पाई है और इसी का फायदा उठाते हुए चीन ने नेपाली सीमा में अतिक्रमण करते हुए कंटीले तार लगा दिए हैं।

नई दिल्ली, डेस्क रिपोर्ट। पड़ोसी मुल्क अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। भारत से चल रहे सीमा विवाद के बीच अब ड्रैगन नेपाल की जमीन हथिया ने के चक्कर में है। जानकारी के अनुसार, चीन ने बिना किसी को बताए सीमा से सटे नेपाल के गोरखा जिले के रूइला में कटीले तार लगा दिए हैं। यह वहीं क्षेत्र है, जहां दो साल पहले चीन ने सैन्य ठिकाने बना लिए थे और अब टीले तार लगा कर सीमा को बंद कर दिया है।

बता दे, हिमालय की श्रृंखला होने के कारण नेपाल की सीमा की वास्तविक स्थिति पता नहीं चल पाई है और इसी का फायदा उठाते हुए चीन ने नेपाली सीमा में अतिक्रमण करते हुए कंटीले तार लगा दिए हैं।

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स्थानीय लोगों ने दी जानकारी

नेपाल सीमा पर अतिक्रमण की जानकारी स्थानीय लोगों ने दी है, जबकि इस बारे में अभी तक जिला प्रशासन और नेपाली सरकार को कोई जानकारी नहीं है। गोरखा जिले के प्रमुख जिला अधिकारी शंकर हरि आचार्य ने बताया की इस तरह की कोई भी जानकारी हमारे पास नहीं है और न ही चीन की तरफ से इसे लेकर कुछ बताया गया।

उधर, नेपाल की विदेश मंत्रालय की सहायक प्रवक्ता ने रीता धिताल ने बताया कि सीमा क्षेत्र पर कोई भी निर्माण कार्य करने से पहले दोनों देशों की सहमति जरूरी होती है। हालांकि, उन्होंने कहा, ऐसी कोई जानकारी नहीं है कि चीन ने दशगजा क्षेत्र में नेपाली जमीन की ओर ऐसे निर्माण किए हैं।

भारत के साथ हो चुका है विवाद

भारत के साथ चीन का बहुत लंबे समय से सीमा को लेकर विवाद चल रहा है। लेकिन 15 जून 2020 को चीन ने सारी हदें पार कर दी थी। इस दिन चीन और भारत के सैनिकों के बीच भीषण झड़प हो गई थी, जहां भारत के 20 जवान शहीद हो गए थे। इसमें भारी संख्या में चीनी सैनिक भी मारे गए थे। हालांकि चीन ने मारे गए अपने सैनिकों की सही संख्या नहीं बताई थी। इस झड़प के बाद जुलाई महीने में चीनी सैनिक गलवान घाटी से पीछे हट गए थे।

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ताइवान के साथ भी लंबे समय से विवाद

ताइवान को अपना हिस्सा समझने वाले चीन ने पिछले कुछ समय से देश में हमले तेज कर दिए है। इस दौरान चीनी रक्षा मंत्री वेई फेंघे ने भी बड़ा बयान देकर इसकी पुष्टि की थी, जहां उन्होंने कहा, “यदि ताइवान स्वतंत्रता की घोषणा करता है तो बीजिंग युद्ध शुरू करने से नहीं हिचकिचाएगा।”