Women’s Day Special: जिस गांव में जाना है मुश्किल, वहां एक महिला घर-घर जाकर दें रहीं गांव के बुजुर्गों को बैंक सुविधा

लीला 5 साल पहले आजीविका के द्वारा संचालित समूह से जुड़ी थी। लीला ने समूह से जुड़ने के बाद कुछ अलग करने का मन बनाया, जिससे उसके इलाके के लोगों को लाभ हो और अब वह गांव में घर-घर बैंक सुविधा दें रहीं है।

अलीराजपुर, यतेंद्रसिंह सोलंकी। जिले के दुर्गम इलाको तक पहुंचना कोई आसान काम नहीं है। लेकिन, आपको हम कहे की इस जिले के पहाड़ी इलाके के मथवाड़ और बखतगढ़ के लोग घर बेठे बैंक सुविधा का लाभ लेते है और घर पर ही इनका बैंक का लेनदेन के काम चुटकियो में हो जाता है, तो आपको यकिन नहीं होगा। आपको इस इलाके की एक युवती जिसका नाम लीला कनेश है जो इन पहाड़ी इलाको में घर-घर जाकर बैंक सुविधा का लाभ लोगों को दे रही है। जो की एक सहासी और सरहानीय काम है। आइए जानें लीला कनेश का घर-घर जाकर बैंक लाभ देने की कहानी..

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12वीं तक नहीं आता था कम्प्यूटर चलाना, अब कर रहीं गांव वालों की मदद
अलीराजपुर जिले के छोटे से गाव बखतगढ़ की रहने वाली युवती लीला कनेश, जो करीब 5 साल पहले आजीविका के द्वारा संचालित समूह से जुडी। लीला ने समूह से जुड़ने के बाद कुछ अलग करने का मन बनाया, जिससे उसके इलाके के लोगों को लाभ हो। उसने समूह से 50 हजार को लोन लिया लेपटोप खरीदने के लिए। लीला तब सिर्फ 12वीं पास थी। लेकिन, उसे कम्प्यूटर का कोई ज्ञान नहीं था। लीला ने पहले कम्प्यूटर का ज्ञान लिया और मप्र ग्रामीण बैंक की छकतला शाखा से जुड़ी और बतोर बैंक सखी बनकर काम शुरू किया। लीला ने देखा की उसके पास दूर-दूर से बुजुर्ग लोग पैदल चलकर थोड़ी सी राशि निकालने के लिए आते तो उसको एक नया आइड़िया आया की क्यों न इन बुजुर्ग लोगों को घर-घर जाकर ही राशि दी जाए। जिसके  बाद शुरू हुआ लीला का सफर और फिर लीला रोजाना अपना लेपटोप लेकर निकल जाती थी लोगों के घर पर राशि देने। लीला के इस सहासी काम से लगभग 15 से ज्यादा गांव के लोगों को फायदा मिलना शुरू हुआ। जहां पहुंचने का मार्ग काफी खराब है। आज लीला का मासिक ट्रानजेक्शन 45 लाख रूपये है। लीला युं ही आज भी अपना कर्तव्य निभा रही है। जो कभी पेड़ के निचे तो कभी झोपड़ो में लाखो का आनलाईन ट्रांजेक्शन कर रही है।

 

लीला के इस सहासी काम से आस पास के गांव वाले भी बहुत खुश है और अब ये दुर्गम गांव में रहने वाले लोग अपने घरों पर ही लीला का इंतजार करते है के कब वे आए और हमे राशि दे। अब ये लोग कोसो दूर सफर नहीं करते है। वही इसका सबसे बड़ा फायदा बुजुर्गों को हुआ है। पेंशन के पेसे निकालने के लिए अब इन्हें लम्बी दुरी का सफर नहीं करना पड़ता। लीला ने लॉक डाउन में भी लोगों को परेशान नहीं होने दिया और सरकार के द्वारा विभिन योजनाओं की राशि हितग्राहियों के घर-घर जाकर आनलाइन ट्रांजेक्शन करवाया। वहीं लीला के इस साहसी काम की अधिकारी भी तरीफ करते हैं। इस पिछड़े जिले में इस तरह दुर्गम इलाको में जाकर काम करने के लिए युवती लीला की तारीफ करते है।