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भिंड, डेस्क रिपोर्ट। पिछले दिनों जिला कांग्रेस कमेटी में पूर्व मंत्री और लहार विधायक गोविंद सिंह (govind singh) के खिलाफ कांग्रेसी नेताओं ने निंदा प्रस्ताव पारित किया। हालांकि इसके बाद भी यह मामला थमने का नाम का नाम नहीं ले रहा है। इसी बीच भिंड (bhind) से एक बड़ी खबर सामने आई है। जहां प्रदेश किसान कांग्रेस के महामंत्री अशोक भदौरिया (Ashok Bhadoria) ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।

दरअसल अपने पद से इस्तीफा (resign) देते हुए प्रदेश किसान कांग्रेस के महामंत्री अशोक भदौरिया ने गोविंद सिंह पर भितरघात के आरोप लगाए हैं। अशोक भदौरिया ने कहा कि गोविंद सिंह के डीएनए (DNA) में कांग्रेस है ही नहीं और गोविंद सिंह के रहते कांग्रेस कभी सफल नहीं हो पाएगी।

इससे पहले पूर्व मंत्री गोविंद सिंह के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित होने पर उनके करीबी और किसान कांग्रेस के प्रदेश सचिव खिजर कुरैशी ने भी गोविंद सिंह के समर्थन में पार्टी की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। इसके साथ ही गोविंद सिंह के समर्थक पदाधिकारियों ने जिला अध्यक्ष जयराम बघेल के खिलाफ जांच कर उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की थी। इतना ही नहीं तीन दर्जन से अधिक कांग्रेसी नेताओं ने मीडिया (media) के सामने गोविंद सिंह का पक्ष रखते हुए कहा था कि गोविंद सिंह ने हमेशा पार्टी के लिए काम किया है। उन पर ये आरोप निराधार है। उन्होंने कभी पार्टी से भितरघात नहीं किया है।

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बीजेपी ने ली चुटकी

इस मामले में बीजेपी नेता रमेश दुबे (Ramesh Dubey) ने भी चुटकी ली है। उन्होंने भी जिला कांग्रेस के अधिकारियों का समर्थन करते हुए कहा है कि बात सच है कि गोविंद सिंह ने कभी कांग्रेस के लिए काम नहीं किया।

बता दें कि बीते दिनों मेहगांव उपचुनाव (Mehgaon by-election) में भितरघात को लेकर गोविंद सिंह के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया गया था। निंदा प्रस्ताव पारित होने के बाद गोविंद सिंह को पार्टी से निष्कासित करने के लिए यह प्रस्ताव हाईकमान को भेजने की बात कही गई थी।

गोविंद सिंह पर आरोप है कि उन्होंने हेमंत कटारे (Hemant katare) को उपचुनाव में हराने के लिए पार्टी के साथ भितरघात किया है। वहीं उन्हें पार्टी से 6 साल के लिए निष्कासित करने का प्रस्ताव हाईकमान भेजने की बात कही गई है। अब ऐसे में कांग्रेस के अंदर इस इस गुटबाजी पर बीजेपी ने चुटकी लेना शुरू कर दिया है। अब ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि पीसीसी चीफ और हाईकमान इस मामले को आगे कौन सी दिशा देते हैं।