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रीवा सुपर स्पेशलिटी अस्पताल का बेस पिलर खिसका, उमंग सिंघार का तंज- “स्वास्थ्य विभाग के भ्रष्टाचार की नींव हिल गई है”

उमंग सिंघार ने आरोप लगाया, जनता के टैक्स की लूट से मेडिकल हब नहीं, कमिशन हब खड़ा किया गया है। क्या भाजपा सरकार में मरीजों की सुरक्षा की कोई कीमत नहीं है?
Rewa Super Speciality Hospital

मध्य प्रदेश के रीवा में करोड़ों रुपये की लागत से बिना सुपर स्पेशलिटी अस्पताल एक बार फिर चर्चा में है, इस बार अस्पताल का बेस पिलर खिसक गया है जिससे मरीजों के परिजनों की चिंता बढ़ गई है, उधर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इसपर तंज कसते हुए सोशल मीडिया पर लिखा- “स्वास्थ्य विभाग के भ्रष्टाचार की नींव हिल गई है”

मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार पर हर काम में कमीशनखोरी करने के आरोप लगाने वाली कांग्रेस ने एक बार फिर सरकार को निशाने पर लिया है, मामला रीवा के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में एक बार फिर गुणवत्ताविहीन कार्य का खुलासा हुआ है जो हादसे की आशंका को जन्म दे रहा है।

पहले गिरी थी फाल सीलिंग, अब खिसका बेस पिलर 

दरअसल रीवा के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में पिछले दिनों दो बार फाल सीलिंग गिरी जिससे मरीज और उनके परिजन चोटिल हो गए और वे उस वार्ड को लेकर भयभीत हो गए, अस्पताल प्रबन्धन ने इस घटना को तकनीकी खामी बताकर टाल दिया लेकिन अब बेस पिलर खिसकने के बाद घटिया निरमं की पोल खुल गई तो प्रबंधन चुप है।

“भाजपा सरकार की भ्रष्टाचार नीति का नतीजा है”

बिल्डिंग के बेस पिलर में आई बड़ी सी दरार और उसके जगह से खिसकने का वीडियो सोशल मीडिया अपर वायरल हो रहा है जिसपर कांग्रेस ने निशाना साधा है, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने X पर लिखा- स्वास्थ्य विभाग के भ्रष्टाचार की नींव हिल गई है, रीवा सुपर स्पेशलिटी अस्पताल का बेस पिलर खिसकना सिर्फ़ तकनीकी खामी नहीं, बल्कि भाजपा सरकार की भ्रष्टाचार नीति का नतीजा है।

सिंघार का सवाल, यह अस्पताल है या भ्रष्टाचार का स्मारक?

उमंग सिंघार ने लिखा, 150 करोड़ की लागत से बनी यह इमारत 4–5 साल भी नहीं टिक नहीं पा रही है। बार-बार फॉल सीलिंग गिरने की घटनाओं को तो मामूली बता कर दबा दिया गया, लेकिन अब तो पूरा पिलर खिसक गया और मरीजों की जान भगवान भरोसे छोड़ दी गई।  यह अस्पताल है या भ्रष्टाचार का स्मारक?

Atul Saxena
लेखक के बारे में
पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena
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