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दूरदर्शी व कठोर निर्णय जिनकी पहचान, अमित शाह जी है उनका नाम : डॉ नरोत्तम मिश्रा

Written by:Amit Sengar
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भोपाल, हरप्रीत कौर। प्रदेश के गृह मंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा (Dr Narottam Mishra) ने कहा है कि कुछ लोग ऐसे भी होते है जिन्हें अपने भीतर समेटने के लिए इतिहास के पन्ने स्वयं फड़फड़ाने लगते है। ऐसे ही व्यक्तित्व है मां भारती के सच्चे सपूत हमारे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जी। दूरदर्शी व कठोर निर्णय जिनकी पहचान है। डॉ मिश्रा ने पुलिस व प्रशासनिक भवनों के लोकार्पण समारोह को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम को केंद्रीय मंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने भी संबोधित किया।
गृह मंत्री डॉ मिश्रा ने कहा कि पूरा देश जानता है कि हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी व केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह दोनों ही राष्ट्रीयता, राष्ट्रबोध, राष्ट्र वंदना और राष्ट्र अराधना के लिए जाने जाते हैं। यही कारण है कि यह पहली बार है कि इस जोड़ी की नियत पर देश कभी शक नही करता है। अमित शाह जी जिस कार्यकम के लिए यहाँ उपस्थित है वह है पुलिस जवानों के आवासों के लिए। देश के सर्वोच्च पद गृह मंत्री के पद पर बैठा व्यक्ति अपने विभाग की सबसे छोटी इकाई की चिंता करे यह अंत्योदय है। आज हिंदुस्तान के गृह मंत्री चिंता कर रहे है पुलिस जवान की। यह ही अंत्योदय की भावना है। इलाहबाद के कुंभ में प्रधानमंत्री जी ने सफाई कर्मियों के पांव धोए थे वो एक घटना नही एक संदेश था। समाज के अंतिम व्यक्ति के उदय की चिंता का संदेश था। ऐसे ही अमित शाह जी द्वारा पुलिस जवानों के आवासों की चिंता भी इसी अंत्योदय सोच का उदाहरण हैं।
गृह मंत्री डॉ मिश्रा ने कहा कि यह वो ही पुलिस  का जवान है जो कि लॉक डाउन के समय जब ट्रक,बस यहां तक कि साइकिल तक सड़क पर नही थी, तब केवल सड़क पर यह पुलिस जवान था। लोगों की सुरक्षा के लिए जान जोखिम में डाल कर खड़ा था। इनके लिए यह सौगात है।
कार्यक्रम में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कर-कमलों से प्रदेश के पुलिसकर्मियों को 415.4 करोड़ की लागत के 1,537 आवास एवं प्रशासनिक भवनों का शिलान्यास व लोकार्पण किया।
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मुझे अपने आप पर गर्व है कि में एक पत्रकार हूँ। क्योंकि पत्रकार होना अपने आप में कलाकार, चिंतक, लेखक या जन-हित में काम करने वाले वकील जैसा होता है। पत्रकार कोई कारोबारी, व्यापारी या राजनेता नहीं होता है वह व्यापक जनता की भलाई के सरोकारों से संचालित होता है। वहीं हेनरी ल्यूस ने कहा है कि “मैं जर्नलिस्ट बना ताकि दुनिया के दिल के अधिक करीब रहूं।” View all posts by Amit Sengar
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