Guna News : सर्पदंश से मासूम की मौत, तीन अस्पतालों में भागदौड़ करने के बाद भी समय पर नहीं मिल सका उपचार

Amit Sengar
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Two employees engaged in assembly duty died

Guna News : गुना जिला सहित आसपास के अंचलों में सर्पदंश के लगातार मामले बढ़ रहे हैं। कभी झाडफ़ूंक तो कभी समय पर डॉक्टरों का ईलाज नहीं मिलने पर लोग दम तोड़ रहे हैं। अब पड़ोसी जिले विदिशा में रहने वाली एक ढाई साल की बच्ची की मौत समय पर उपचार नहीं मिल पाने के कारण हो गई।

यह है मामला

प्राप्त जानकारी के अनुसार आनंदपुर लटेरी के पास ग्राम नरखेड़ा जागीर में रहने वाली रश्मि बाई पुत्री महेन्द्र सिंह सहरिया को आज रात 1 बजे के करीब जहरीले सांप ने काट लिया। जिसके बाद परिजन तत्काल उसे लेकर आंनदपुर चिकित्सालय लेकर गए। लेकिन यहां कथित सेवा के नाम पर संचालित उक्त अस्पताल में डॉक्टर्स एवं स्टॉफ ने बच्ची का प्राथमिक उपचार तो दूर हाथ लगाना तक जरूरी नहीं समझा। जिसके बाद परिजन उसे गंभीर हालत में आधी रात को ही मोटर सायकिल पर रखकर आरोन प्राथमिक स्वास्थ्य पहुंचे। यहां बच्ची को भर्ती कर मात्र एक ड्रिप लगाकर उसे एम्बुलेंस से गुना रैफर कर दिया। इस भागदौड़ में लगभग चार घंटे से अधिक समय लग गए और सुबह जिला अस्पताल पहुंचते-पहुंचते मासूम बच्ची ने दम तोड़ दिया। सर्पदंश से हुई बच्ची की मौत के बाद सेवा के नाम पर संचालित सद्गुरु अस्पताल से लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर सर्पदंश के मामलों में मिलने वाले तत्काल उपचार के दावों की भी पोल खुल गई। जबकि एक ही दिन पहले ही स्वास्थ्य विभाग के सीएमएचओ द्वारा सर्पदंश के मामलों में एडवाईजरी जारी कर सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर एन्टीस्नेक वीनम के साथ अन्य सुविधाएं होने का दावा किया था।

इस बारे में मृत बच्ची के परिजनों ने बताया कि घटना शनिवार-रविवार की दरम्यानी रात 1 बजे की है। जब बच्ची रश्मि अपने माता-पिता के साथ जमीन पर सो रही थी। इस दौरान करीब तीन फुट लंबे सांप ने उसे डस रखा था। परिजनों ने बच्ची के हाथ को सांप से छुड़ाने की कोशिश की। लेकिन काफी देर तक सांप बच्ची के हाथों को मुंह में दबाएं रखा। जिसे परिजनों ने बेमुश्किल छुड़ाया। परिजनों के अनुसार सांप को बाहर फेंकने के बाद फिर से वह अंदर आकर बच्ची के पास पहुंचने की कोशिश की। जिसके बाद परिजनों ने सांप को मार दिया। फिर बच्ची को तत्काल मोटर सायकिल से सद्गुरु अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां भगवान की मूर्ति माने जाने वाले डॉक्टरों ने मासूम को हाथ तक नहीं लगाया। इस दौरान स्टॉफ ने इलाज करने से इंकार करते हुए कहा कि यहां बच्चों के डॉक्टर नहीं है और कहीं ले जाओ। जिसके बाद पीडि़त आरोन शासकीय अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां से रैफर करने के बाद तडक़े 4 बजे उसने दम तोड़ दिया। यहां रविवार सुबह बच्ची के शव का पीएम कराकर शव परिजनों को सौंप दिया।
गुना से संदीप दीक्षित की रिपोर्ट


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मुझे अपने आप पर गर्व है कि में एक पत्रकार हूँ। क्योंकि पत्रकार होना अपने आप में कलाकार, चिंतक, लेखक या जन-हित में काम करने वाले वकील जैसा होता है। पत्रकार कोई कारोबारी, व्यापारी या राजनेता नहीं होता है वह व्यापक जनता की भलाई के सरोकारों से संचालित होता है। वहीं हेनरी ल्यूस ने कहा है कि “मैं जर्नलिस्ट बना ताकि दुनिया के दिल के अधिक करीब रहूं।”

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