अच्छे चाल चलन का मिला इनाम, गणतंत्र दिवस पर 16 बंदी ग्वालियर सेन्ट्रल जेल से रिहा, बोले – अब अपराध से तौबा

रिहा हुए के बंदी ने कहा कि मैं किसान हूँ , खेती किसानी को लेकर ही मेरा झगड़ा हुआ था, सामने वाले ने मुझपर वार किया तो मैंने गोली मार दी थी, मैंने 14 साल की सजा भुगती है, लेकिन आब बाहर आकर परिवार के साथ रहूँगा, उसने कहा कि आनंद बाहर है वो जेल में नहीं है।

Atul Saxena
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Gwalior Central Jail

Gwalior Central Jail prisoner released : इस बार का गणतंत्र दिवस ग्वालियर सेन्ट्रल जेल में सजा काट रहे 16 बंदियों के लिए खुशियां  लेकर आया, बंदियों के अच्छे चाल चलन को देखते हुए शासन के नियमानुसार बंदियों को रिहा किया गया, जिन बंदियों को रिहा किया गया वे सभी हत्या के आरोप में आजीवन कारावास की सजा काट रहे थे।

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पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं ....