इंदौर, आकाश धोलपुरे। मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी(Economic capital) इंदौर से करीब 8 साल पहले खंडवा रोड़ स्थित आशाराम आश्रम से गिरफ्तार हुए आशाराम बापू के भक्त अभी भी उन्हें गुनहगार नहीं मानते है। यही वजह है कि एक बार फिर आशाराम बापू की रिहाई की मांग उठने लगी है। दरअसल, अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस (Internatinal Women’s Day) के मौके पर आशाराम बापू के पक्ष में आई महिलाओ ने इंदौर कलेक्टर चौराहा पर रैली के रूप में जमकर प्रदर्शन किया।

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संस्कृति रक्षा मंच के बैनर तले सड़को पर उतरी महिलाओं ने दुष्कर्म के आरोपी आशाराम के समर्थन में जमकर नारेबाजी की और रिहाई की मांग उठाई। इस दौरान महिलाएं धर्म, संस्कृति बचाने के साथ आशाराम की गिरफ्तारी पर तख्तियों के जरिए सवाल उठाती नजर आई। महिला साधको में से एक साध्वी नीलू ने मांग कर कहा कि उनके संत श्री आशाराम बापू को पिछले 8 वर्षों से बिना सबूत के जेल के अंदर बन्द रखा है। करोड़ो साधको और महिलाओं की पीड़ा है कि बापू की उम्र 85 वर्ष हो गई और उनके 15 दिन पहले हार्ट में प्रॉब्लम हुई थी।

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बावजूद इसके उनको बेल नहीं दी गई। ये सरासर हमारे साथ अन्याय हो रहा है और हमारी मांग है कि बापू की उम्र और साधको के ह्रदय की पीड़ा को देखते हुए जल्द उन्हें रिहा किया जाए। वही साध्वी ने कहा कि जिस पीड़िता ने शिकायत की थी वो पीड़ित नहीं है बल्कि पूज्य बापू निर्दोष है और उन्हें षड्यंत्र करके फंसाया गया है। साथ ही कहा कि जो पैसे लेकर बिक जाए तो वो पीड़िता नहीं कहलाती है।