पलायन 2.0 : वर्दी भी हमदर्दी भी, सेवा में तत्पर इंदौर पुलिस

इंदौर की राऊ पुलिस ने टैंट लगाकर लोगो के नाश्ते की व्यवस्था करने के अलावा कुछ देर आराम करने के लिए कुर्सियों की व्यवस्था भी की है। वही जो मजदूर पैदल या सायकिल पर सवार होकर आ रहे है उन्हें चप्पल और जूतों की व्यवस्था भी की है।

इंदौर, आकाश धोलपुरे। देशभर में कोरोना (Corona) की दूसरी लहर से हड़कंप मच गया है जिसके बाद एक बार फिर दिल्ली (Delhi) और मुंबई (Mumbai) जैसे बड़े शहरों से दूर दराज के क्षेत्रों में रहने वाले मजदूरों का पलायन भी शुरू हो चुका है। खासतौर पर महाराष्ट्र (Maharashtra) से लोगो ने एक बार फिर अपने तीन पहिया वाहनों को निकालकर यूपी, बिहार (Bihar) और राजस्थान (Rajasthan) की ओर रुख करना शुरू कर दिया है। पलायन करने वाले मजदूरों ने लॉकडाउन (Lockdown) लगने के पहले से ही महाराष्ट्र से अपने-अपने आशियानों की ओर कदम बढ़ा दीया थे, जिसका सीधा असर अब मध्यप्रदेश के नेशनल हाइवे 3 की सड़क पर देखा जा रहा है।

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हालांकि पलायन के पिछले दौर में मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के इंदौर (Indore) से मजदूरों की मदद के लिये जमकर हाथ बढ़े थे, लेकिन इस दफा टुकड़ो में आ रहे लोगों और कोरोना की दूसरी लहर के इंदौर पर असर के चलते पहले जैसी व्यवस्थाएं तो नहीं है लेकिन इंदौर की राऊ पुलिस (Rau police) ने एक बार मदद के हाथ आगे बढ़ाते हुए एक अमिट छाप छोड़ी है। जहां बीते वर्ष राऊ सर्कल के पास बकायदा लोगो के विश्राम से लेकर खाने की व्यवस्था की गई थी, वही इस बार भी पुलिस ने वर्दी में रहकर वो ही जिम्मेदारी सम्भालना शुरू कर दी है। इंदौर की राऊ पुलिस ने इस बार टैंट लगाकर लोगो के नाश्ते की व्यवस्था करने के अलावा कुछ देर आराम करने के लिए कुर्सियों की व्यवस्था भी की है। वही जो मजदूर पैदल या सायकिल पर सवार होकर आ रहे है उन्हें चप्पल और जूतों की व्यवस्था भी की है।

पलायन 2.0 : वर्दी भी हमदर्दी भी, सेवा में तत्पर इंदौर पुलिस

वर्दी भी हमदर्दी भी मिशन के साथ पलायन करने वाले लोगो की मददगार बनी है।राऊ और इंदौर पुलिस की लोग तारीफे करते नहीं थक रहे है क्योंकि पुलिस न सिर्फ लोगो की सुविधाओं का ध्यान रख रही है बल्कि आवश्यकता पड़ने पर लोगो को इलाज तक मुहैया करवा रही है। ये ही वजह है कि मजदूरों ने खुद मुंबई और मिनी मुंबई की पुलिस में तुलना शुरू कर दी है। मुंबई में ठाणे से यूपी के बनारस जा रहे संजय चौहान को भले ही 1400 किलोमीटर का सफर ओर तय करना है लेकिन इंदौर में आकर उन्हें अपनेपन का अहसास होता है और उनका कहना है कि महाराष्ट्र में कोई मदद नहीं करता है उल्टा पुलिस उनसे डिमांड करती है जबकि एमपी के इंदौर में ऐसा नहीं है। पहले भी और अब भी पुलिस ने मदद ही की है। वही परिवार के 25 लोगों के साथ रिक्शाओं में सफर यूपी जाने वाली संगीता नामक महिला ने भी माना कि इंदौर में हमेशा मदद के हाथ बढ़ते है।

पलायन 2.0 : वर्दी भी हमदर्दी भी, सेवा में तत्पर इंदौर पुलिस

इधर, नासिक से मेहर सतना लौट सकेत परिवार के 5 वर्षीय बच्चे की पैर में चोंट थी और जब पुलिस की नजर इस पर पड़ी तो तुरंत राउ पुलिस ने मासूम बच्चे का इलाज नजदीकी निजी अस्पताल में करवाया। वही खेतिया महाराष्ट्र से सायकिल पर सवार होकर दरभंगा लौट रहे नीरज कुमार पासवान को बिना चप्पल सायकिल चलाते देख पुलिस से रहा नहीं गया और इंदौर पुलिस ने उसके लिए चप्पल की व्यवस्था करवाई ताकि आगे के सफर में उसकी मुश्किलें कुछ कम हो जाए।

पलायन 2.0 : वर्दी भी हमदर्दी भी, सेवा में तत्पर इंदौर पुलिस

आपकी सेवा में इंदौर पुलिस के ध्येय के साथ खड़ी राऊ पुलिस के थाना प्रभारी नरेंद्र रघुवंशी ने बताया कि खाने-पीने के साथ इलाज की व्यवस्था भी पुलिस द्वारा की जा रही है और जितने भी मजदूर वहां से गुजरेंगे उनकी हरसंभव मदद करने का प्रयास पुलिस द्वारा किया जाएगा। यूं तो इंदौर पुलिस के कई रूप समय-समय पर सामने आते है लेकिन जिस तल्लीनता से पुलिस अपने कर्त्तव्य के साथ सेवा कार्य मे जुटी है उससे ये तो साफ है कि इंसानियत जिंदा है और जिंदा रहेगी।

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