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जबलपुर में आयोजित हुई लेखा समिति की बैठक, कई मुद्दों पर हुई चर्चा

Written by:Harpreet Kaur
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जबलपुर में आयोजित हुई लेखा समिति की बैठक, कई मुद्दों पर हुई चर्चा

जबलपुर, संदीप कुमार। सरकार की विभिन्न विकास योजनाओं के लिए ग्राम पंचायतों में पहुंचने वाला सरकार का 1 रुपय ग्राम पंचायतों पर पहुंचता तो जरूर है लेकिन खर्च नहीं होता। यह मामला सोमवार को जबलपुर (Jabalpur) में आयोजित हुई प्रदेश की स्थानीय निकाय एवं पंचायती राज की लेखा समिति की बैठक में उठा। ऑडिट की विभिन्न आपत्तियों की समीक्षा के लिए यह पहला मौका था जब शिवराज सरकार (Shivraj Government) के कार्यकाल में समिति की बैठक आयोजित की गई हो। क्योंकि इस बैठक का आयोजन जबलपुर जिले में किया गया इस लिहाज से जिले की ही समीक्षा में कई आपत्तियां उठी।

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विशेष रुप से 2008 से लेकर अब तक उठाई गई आपत्तियों पर महालेखागार याने सीएजी द्वारा निराकरण ना करने की बात हर विभाग ने दोहराई। करीब 4 घंटे की पंचायत स्तरीय समीक्षा बैठक में समिति के सभापति अजय विश्नोई ने निर्देश दिए कि जो भी विभाग महालेखाकार द्वारा ऑडिट की आपत्तियों पर निराकरण ना करने की बात कह रहे हैं वह लिखित में अपना जवाब प्रस्तुत करें। बैठक में विशेष तौर पर ग्राम स्वरोजगार पोर्टल में बदलाव की मांग की गई जिसकी अनुशंसा भी अब समिति करेगी। सभापति के मुताबिक ग्राम स्वराज पोर्टल पूर्णता अंग्रेजी है और समझने में कठिन भी है। ऑनलाइन वेब पोर्टल के आ जाने से सरपंच और सचिव का काम खत्म सा हो गया है और रोजगार सहायक ही तमाम योजनाओं की एंट्री कर कार्य संपन्न करता है। जिससे परेशानियां उत्पन्न हो रही हैं। वहीं प्रधानमंत्री आवास योजनाओं के तहत ग्रामीण क्षेत्र में मिलने वाली राशि 1 लाख 20 हज़ार जबकि शहरी क्षेत्र में यही राशि ढाई लाख है। इस अंतर को भी खत्म करने के लिए समिति के समक्ष मांग थी जिस पर सहमति जताते हुए अब लेखा समिति शासन को अनुशंसा करेगी।

समिति के सदस्य और कांग्रेस विधायक विनय सक्सेना ने स्पष्ट किया कि करोड़ों की योजनाओं में सरपंचों ने अग्रिम राशि लेकर रखी है लेकिन उनका समायोजन नहीं कराया। ऐसे तमाम मामलों पर सचिवों से तो कार्रवाई करते हुए वसूली कर ली गई लेकिन सरपंच आज भी बचे हैं । समिति के सदस्य के रूप में विधायक विनय सक्सेना ने कहा कि इसके पूर्व की समितियां ना जाने कैसा काम करती रही जो अब तक ऑडिट की आपत्तियों पर कोई कार्यवाही नही कर सकी। जो भी हो अब 10 दिनों के भीतर तमाम विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि वे लिखित में जवाब दें जिन्हें विधानसभा की समिति पटल पर रखा जाएगा।

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