
जबलपुर, संदीप कुमार। केंद्रीय सुरक्षा संस्थान के निगमीकरण होने को लेकर कर्मचारी हड़ताल की तैयारी कर रहे थे। देश भर के तमाम 42 केंद्रीय सुरक्षा संस्थानों को निगमीकरण करने के चलते कर्मचारियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ आंदोलन का रूख अपनाया और बीते एक सप्ताह से जबलपुर की ऑर्डिन्स फैक्ट्री खमरिया के कर्मचारी क्रमिक अनशन पर बैठ गए। इधर सरकार ने कर्मचारियों के इस आंदोलन को देखते हुए अध्यादेश लाया और चेतावनी दी कि कर्मचारी अगर अनशन बन्द नही किए तो कार्रवाई की जाएगी।
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केंद्र सरकार की ओर से सुरक्षा संस्थानों की सेवाओं को आवश्यक सेवाओं की सूची में शामिल करने के साथ-साथ हड़ताल करने पर जुर्माना और सजा के प्रावधान किया गया, जिसके बाद शनिवार को जबलपुर में चल रहे आंदोलन को समाप्त कर दिया गया। इधर कर्मचारी महासंघों ने केंद्र सरकार के इस फैसले का विरोध किया है। उनका कहना है कि यह लोकतंत्र के खिलाफ है, जिसके चलते अब कर्मचारी संघ अदालत का दरवाजा खटखटाने की तैयारी कर रहा है। इस बीच 26 जुलाई से निगमीकरण के खिलाफ आयुध निर्माणियों के कर्मचारियों की बेमियादी हड़ताल स्थगित कर दी गई है।
आइएनडीडब्ल्यूएफ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अरुण दुबे की मानें तो सरकार जो अध्यादेश लाई है, उसमें हड़ताल करने के कर्मचारी के अधिकार को छीनने का प्रयास किया गया है। हड़ताल में शामिल होने वाले लोगों पर 10 हजार रुपए का जुर्माना और दो साल की सजा का प्रावधान किया है। इसी प्रकार हड़ताल के लिए प्रेरित करने वाले लोगों पर भी जुर्माना लगाया जाएगा। देश के तीनों कर्मचारी फेडरेशनों ने यह तय किया है कि सरकार के आदेश के खिलाफ अब अदालत जाया जाएगा। फिलहाल कर्मचारियों का नुकसान नहीं हो इसलिए हड़ताल स्थगित की गई है।
पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

