‘सौभाग्य’ बिजली घोटाले की जांच में खर्च हो रही तगड़ी राशि, अब भी दिल्ली बहुत दूर

जबलपुर, संदीप कुमार। प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना (सौभाग्य) के घोटाले को उजागर करने में ही कंपनी के करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं और अभी जांच पूरी भी नहीं हुई है। सिर्फ एक जिले में ही 3 करोड़ के आसपास घोटाला मिला है। बाकी के तीन जिलों में जांच अभी अधूरी है। विद्युत विभाग जांच के लिए एक सैंकड़े से ज्यादा अमला जुटा रहा है। पिछले 4 माह से ज्यादा समय से सौभाग्य घोटाले की जांच पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी करवा रही है, जिसमें जिले से बाहर के अधिकारियों को नियुक्त किया गया है। इनका वेतन, वाहन और खाने-पीने पर भी भारी खर्च किया जा रहा है। हालांकि कंपनी प्रबंधन से अभी तक खर्च का खुलासा नहीं हुआ है।

एक-एक घर का कनेक्शन चेक कर रही जांच टीम
सौभाग्य योजना में दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों के घर बिजली पहुंचानी थी। योजना में फर्जी कनेक्शन और अधोसंरचना की शिकायत हुई जिसकी जांच दिसंबर 2018 में प्रारंभ हुई। मामले को लेकर विधानसभा में सरकार को जवाब देना पड़ा था। जहां ऊर्जा मंत्री ने एक माह में जांच पूरी करवाने का भरोसा दिया था। व्यावहारिक तौर पर जांच बड़ी होने के कारण समय सीमा बढ़ी जांच करने के लिए कई टीम बनानी पड़ी।

मंडला-डिंडौरी, सीधी और सिंगरौली जिले में जांच हुई
मंडला-डिंडौरी के लिए जबलपुर मुख्यालय से टीम गई वहीं सीधी और सिंगरौली के लिए रीवा संभाग और स्थानीय अधिकारियों को जोड़ा गया। एक सैकड़ा से ज्यादा लोग इस काम में जुटे। सूत्रों की मानें तो लाख रुपये से ज्यादा का मासिक वेतन लेने वाले आधा सैकड़ा से ज्यादा अफसर इसमें शामिल हुए। करीब तीन-चार माह जांच करते हुए बीता, इसके अलावा वाहन लंबी दूरी तय करने कई दफा दौड़े। रहने और खाने के अलावा जांच के लिए दस्तावेज पर भी लाखों रुपये का खर्च आया।

डिंडौरी जिले में जांच करने वाले एक अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि तीन माह तक 40 सदस्यों की टीम ने एक-एक कनेक्शन चेक किया। इसमें लाखों रुपये का खर्च आया।

जांच की हकीकत                                                                                  मंडला जिले में घोटाले की जांच पूरी हो चुकी है। वहीं डिंडौरी की जांच बाकी है। बड़ी जांच के कारण कई चरण में रिपोर्ट ली जा रही है। कंपनी स्तर पर 18 इंजीनियरों को आरोप पत्र जारी कर विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। सिंगरौली के 44 पीओ शेष हैं। इनकी जांच हफ्तेभर में पूरी हो जाएगी। अंतरिम रिपोर्ट मिल चुकी है। वहीं सीधी जिले 3054 पीओ हैं। वहां जांच में अभी लंबा वक्त लगेगा।

इनका कहना है
सौभाग्य योजना की जांच जारी है। मंडला और डिंडौरी जिले में जांच के साथ ही आरोप पत्र भी जारी किए जा चुके हैं। जांच पर खर्च को लेकर कोई आंकड़ा साफ नहीं है। विभागीय टीम लगी है जिनके आने-जाने के लिए पूल वाहन और खाने पर ही राशि खर्च हो रही है।
कविता बाटला, मुख्य महाप्रबंधक, मानव संसाधन, पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी

 

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