मछुआरे की बेटी ने किया मप्र का नाम रोशन, कैनोइंग तैराकी में एशियन स्टार बनेगी खंडवा की कावेरी

गांव के बैक वाटर से तैराकी की शुरूआत करने वाली कावेरी ने हाल ही में सब जूनियर में गोल्ड मेडल हासिल किया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने वाली कावेरी मछली पकडऩे वाले एक गरीब पिता रणछोड़ ढीमर की बेटी है।

खंडवा, सुशील विधानी| कहते हैं कि लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती और कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती। पुनासा के पास बीड़ गांव के एक मछुआरे की बेटी कावेरी ढीमर ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है। कावेरी ने गांव के बैकवाटर से तैराकी सीखकर कैनोइंग (Canoeing) जो कि विदेशी खेल है। उसमें मध्यप्रदेश (Madhyapradesh) का प्रतिनिधित्व करते हुए परचम लहराया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने वाली कावेरी मछली पकडऩे वाले एक गरीब पिता रणछोड़ ढीमर की बेटी है।

समाजसेवी व प्रवक्ता सुनील जैन ने बताया कि खंडवा जिला दादाजी धूनीवाले, किशोर कुमार और माखनलाल चतुर्वेदी के नाम से जाना जाता है लेकिन खंडवा जिले में कई ऐसी छुपी हुई प्रतिभाएं भी हैं जो जिले का नाम प्रदेश, देश ही नहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन कर रही है। एक मछुआरे की बेटी कावेरी ढीमर ने पुनासा के पास बीड़ गांव के बेक वाटर से तैराकी सीख कर अपने हुनर का परिचय देते हुए कैनोइंग औ कयाकिंग जो कि विदेशी गेम है उसमें मप्र का परचम लहाराया है।

छोटी उम्र, बड़ा मुकाम
गरीबी और मुफलिसी के बीच कुछ करने की चाहत ने कावेरी को वो पहचान दी जो शायद कम ही लोगों को नसीब होती है। सीमित संसाधनों के बाबजूद तैराकी के साथ कैनोइंग में कुछ कर गुजरने की हसरत से छोटी सी उम्र में कावेरी ने एक बड़ा मुकाम हासिल किया है। उसके परिवार में इस खेल के प्रति इतना समर्पण नहीं था,लेकिन खंडवा के पूर्व जिला खेल अधिकारी जोसफ बक्सला,कोच चेतन गोहर ने इस बालिका को ग्रामीण क्षेत्र से निकालकर भोपाल तक पहुंचाया।

पिता का कर्ज दूर किया
कोच चेतन गौहर ने बताया कि इस बेटी की उपलब्धि इस बात से लगाई जा सकती है कि छोटी सी उम्र में उसने न सिर्फ अपने पिता के कर्ज को दूर किया, बल्कि अपने परिवार का पालन पोषण भी किया। इस बच्ची की तैराकी के बारे में जब हम को पता लगा तो जिला खेल अधिकारी और हम उनके घर पहुंचे।

बड़ी स्टार खिलाड़ी
सुनील जैन ने बताया कि इंदिरा सागर डेम के बैकवाटर के पास उनका घर है। परिवार का पालन पोषण मछली मारने और उससे बेचने के पैसे से होता है। पिता कर्ज में थे,लेकिन बेटी ने हिम्मत नहीं हारी। अपने हुनर के बल पर वह मध्य प्रदेश में कैनोइंग खेल में सबसे कम उम्र में एक बड़ी स्टार खिलाड़ी है।

तैराकी में गोल्ड मैडल
गांव के बैक वाटर से तैराकी की शुरूआत करने वाली कावेरी ने हाल ही में सब जूनियर में गोल्ड मेडल हासिल किया। जूनियर में गोल्ड मेडल मिला जूनियर रहते हुए सीनियर में गोल्ड मेडल लेना सबसे बड़ी उपलब्धि है। कैप्टन पीयूष वारोई मुख्य कोच मध्य प्रदेश वाटर स्पोट्र्स अकादमी ने बताया कि ओलंपिक और एशियन चैंपियनशिप के लिए इसी माह कैंप आयोजित होने वाला है। खिलाड़ी कावेरी ने जो कर दिखाया है वह हर कोई नहीं कर सकता सब जूनियर में रहते हुए सीनियर में गोल्ड लेना बहुत बड़ी बात होती है।

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