मुरैना, संजय दीक्षित। प्रदेश की मुखिया कहते है भ्रष्टाचार करने वालों को नहीं छोड़ेंगे, उनको सलाखों के पीछे डाल देंगे। लेकिन उनके ही कार्यकाल में सरपंच और सचिवों द्वारा घटिया स्तर का निर्माण कार्य करा कर जनता की आंखों में धूल देने का कार्य किया जा रहा हैं। मामला मुरैना (morena) जिले का है जहां कई पंचायत ऐसी है जहां घटिया स्तर का निर्माण कराया गया हैं। लेकिन संबंधित आलाअधिकारी मौन बने हुए है।

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एक ऐसा ही मामला भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बीडी शर्मा (VD Sharma) के पैतृक गांव सुरजनपुर में देखने को मिला है। जहाँ सरपंच-सचिवों ने ऐसे घटिया निर्माण कार्य कराए हैं, जो कुछ महीनों में ही उखड़ कर रह गए। और सड़क की सीमेंट और गिट्टी ग्रामीणों के हाथों में आ गयी। जिसमें 5 साल की गारंटी वाली रोड 8 महीने में ही उखड़ कर जर्जर हालत हो गयी। सरपंच द्वारा जो नाले-नालियां बनाईं गयी थी उसकी भी हालत जर्जर होे चुकी हैं। निर्माण कार्यों की ऐसी दुर्दशा देखकर गांव के एक युवा ने सूचना के अधिकार के तहत निर्माण कार्याें की जानकारी पंचायत से मांगी थी। लेकिन सात महीने से गांव के सचिव इस युवा को जानकारी देने के नाम पर इधर से उधर दौड़ा रहे हैं।

वहीं सुरजनपुर गांव में सितंबर-अक्टूबर पंचायत ने मुख्य रास्ते पर सीसी सड़क का निर्माण करवाया था। इस रोड का निर्माण माता बसैया रोड से जोड़कर गांव के अंदर भगवती प्रजापति के मकान तक 200 मीटर से ज्यादा इस लंबी सड़क पर पंचायत ने 5 लाख रुपये से ज्यादा का खर्च किया था। सड़क बनने के तीन महीने बाद ही रेता-गिट्टी से बनी सीमेंट ऐसे खड़ने लगी जैसे कि पैदल चलने वालों के पैरों में गिट्टी समा रही थी और गाड़ियां पंचर हो रही थी। अब सड़क की दुर्दशा ऐसी है मानों यहां सूखा रेता-गिट्टी डाल दिया हो। जो हाथों से समेटने पर मुट्ठी में भर जाता है। दो-ढाई महीने में बनने के बाद ही सड़क उखड़ने लगी।

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यह सब देखकर गांव के युवा राघवेन्द्र डण्डोतिया ने सूचना के अधिकार के तहत एक आवेदन देकर जानकारी मांगी थी। जिसमें वर्तमान सरपंच के कार्यकाल में पंचायत में क्या-क्या विकास कार्य, कहां-कहां हुए हैं? इन विकास कार्यों पर पंचायत ने कितनी राशि खर्च की है? राघवेन्द्र डण्डोतिया ने 21 जनवरी को यह आवेदन दिया और 21 फरवरी तक उन्हें जानकारी मिल जानी थी। पंचायत ने जानकारी देने के एवज में 750 रुपये जमा कराने का नोटिस राघवेन्द्र को 18 फरवरी के आसपास दिया। इसके बाद से ही राघवेन्द्र 750 रुपये लेकर पंचायत के चक्कर काट रहा है। यह रुपये सचिव कांतिदेवी को जमा कराने हैं। राघवेंद्र का आरोप है कि 6 महीने से सचिव, पंचायत के कार्यों को देखने के लिए नहीं आईं हैं। उन्हें कोई काम होता है तो सरपंच अपनी गाड़ी से लेकर आता है। सरपंच के घर काम निपटाकर चुपचाप चली जाती हैं। सचिव कांतिदेवी को फोन लगाया तो उनके पति ने फोन उठाया और काट दिया। फिर दोबारा उन्होंने फोन नहीं रिसीव नहीं किया। इसके बाद सरपंच सोवरन सिंह को कॉल किया गया तो उनका भी मोबाइल स्विच ऑफ था। अब देखना होगा कि प्रशासन सरपंच सचिव के खिलाफ कार्यवाही करता है या फिर मामले को रफादफा कर दिया जाएगा।