मुरैना : पहले ऑक्सीजन की कमी से मौत, फिर स्ट्रेचर नहीं मिला तो ठेले पर ले जाना पड़ा शव

मुरैना जिला अस्पताल में लापरवाही का मामला सामने आया है। जहां ऑक्सीजन न मिलने से मरीज की तड़प-तड़पकर मौत हो गई। जिसके बाद शव को ठेले पर रखकर एम्बुलेंस तक ले जाया गया।

मुरैना, संजय दीक्षित। जिला अस्पताल में समय पर ऑक्सीजन (Oxygen) न मिलने के चलते एक मरीज की मौत हो गई। मृतकों के परिजनों ने ऑक्सीजन की कमी से मौत होने का आरोप लगाया है, तो वहीं अस्पताल प्रबंधन की भी लापरवाही सामने आई है। वहीं सीएमएचओ डॉ. एडी शर्मा का कहना है कि अस्पताल में ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं है। बताया जा रहा है कि मरीज को ऑक्सीजन के लिए परिजन रातभर भटकते रहे लेकिन किसी ने भी उनकी मदद नहीं की और सुबह मरीज की मौत हो गई। जिसके बाद शव को एम्बुलेंस तक ले जाने के लिए स्ट्रेचर तक की व्यवस्था भी नहीं कि गई। जहां परिजनों ने ठेले पर शव रखकर एम्बुलेंस तक ले गए।

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यह है पूरा मामला

जिला अस्पताल में कल्लू को उसके पिता रविवार की रात लेकर आये तो डॉक्टरों ने उसे कोविड वार्ड (Covid Ward) में भर्ती कर दिया। उसकी हालत बहुत खराब थी। उसे आक्सीजन की जरूरत थी। लेकिन नर्स स्टाफ ने उसके लिए ऑक्सीजन की व्यवस्था नहीं की। काफी बार परिजन रातभर घूमते फिरते रहे लेकिन सुबह तक ऑक्सीजन की व्यवस्था नहीं की। जिससे तड़प-तड़प कर उसकी मौत हो गई। सुबह परिजन अपने बेटे को देखकर फफक-फफक कर रोने लगे और डॉक्टरों से उल्टा सीधा बोलने लगे। अस्पताल वाले बोले लाश ले जाओ। लाश एम्बुलेंस तक ले जाने के लिए अस्पताल में स्ट्रेचर तक की व्यवस्था नहीं थी। उसके बाद परिजन हाथ ठेले पर शव को रखकर वार्ड में ले गए। मजबूरन कल्लू के पिता ने एक हाथ ठेले वाले को बुलाया उससे कहा कि उसके बेटे की लाश को एम्बुलेंस तक ले जाना है। ठेले वाले को मेडीकल वार्ड में ले गए और कल्लू राठौर की लाश को ठेले पर रखकर बाहर एम्बुलेंस तक ले गए दिल-दहलाने वाला बदइंतजामी का जीता-जागता नजारा सोमवार को जिला अस्पताल में देखने को मिला। जिसने भी शव को देखा तो अस्पताल के सीएस को जमकर कोसा।

किसी को स्पेशल थाली तो किसी को खाना भी नसीब नहीं

कोविड वार्ड में भर्ती मरीज विनोद शर्मा निवासी अम्बाह ने बताया कि उन्हें कल से खाना नहीं मिला है। जब कि अन्य वार्डों में कई लोगों के लिए स्पेशल थाली बनकर आ रही है। अगर कोई मरीज यह कहता है उसे खाना नहीं मिला है तो उससे कहा जाता है कि घर से बर्तन लेकर आओ।इसके साथ ही कोविड वार्ड में मरीजों के पलंगों पर गद्दों और चादरों की व्यवस्था भी नहीं की गई हैं।अस्पताल के ठीक पीछे ऑक्सीजन प्लान्ट (Oxygen Plant) लगा है लेकिन उसके बावजूद अस्पताल में लोग बिना ऑक्सीजन के मर रहे हैं। सरकार मरीजों के खाने के लिए पूरा बजट दे रही है। उसके बावजूद मरीजों को खाना नसीब नहीं मिल रहा है। इस बदइंतजामी व लापरवाही ने मरीजों की जिंदगी बद से बद्दतर होती जा रही हैं।कोविड वार्ड में भर्ती मरीजों को रात से ही ऑक्सीजन कम मिल रही थी। ऑक्सीजन का फ्लो कम होने पर मरीजों में अफरा-तफरी मच गई। इसके बाद सूचना मिलते ही सुबह आरएमओ डॉ. धर्मेन्द्र गुप्ता ठेकेदार को लेकर इसकी जांच करने पहुंचे और ऑक्सीजन की नलियों को चेक कराया गया। जिसमे गड़बड़ी दिखाई दी तो तुरन्त ऑक्सीजन फ्लो मीटर को तुरन्त बदलवाया गया। तब कही जाकर मरीजों को ऑक्सीजन मिली। रिफलिंग वाले सिलेंडरों में कम ऑक्सीजन भरने पर मरीज को प्रॉपर ऑक्सीजन नहीं मिल पा रही है जिससे आये दिन मौत हो रही है।

सीएमएचओ बेखबर

मरीजों के परिजन ऑक्सीजन प्लान्ट पर जब खाली सिलेंडर लेकर पहुंचते हैं तो उन्हें बहुत कम भरा सिलेंडर दिया जाता है। उनके पास सिलेंडर में मौजूद ऑक्सीजन नापने की मशीन भी उपलब्ध नहीं है। परिजन समझते हैं कि सिलेंडर पूरा भरा है जब थोड़ी देर में ऑक्सीजन खत्म हो जाती है तब पता चलता है कि बहुत कम ऑक्सीजन भरी है। इस पूरे मामले में सीएमएचओ डॉ.एडी शर्मा ने कहा कि अगर कल्लू के परिजनों को ऑक्सीजन नहीं मिली थी तो वे सिविल सर्जन या मुझसे बात करते। ऑक्सीजन पर्याप्त है। मेरी जानकारी में यह मामला नहीं है। मैं मामले की जानकारी लेकर कार्रवाई करूंगा। जहां तक खाने का सवाल है तो मैं दिखवाता हूं कि किस मरीज को खाना नहीं मिल रहा है।

मेडीकल वार्ड प्रभारी ने फार्म भरने से किया इंकार

समाजसेवी व भाजपा नेता अरुण परमार ने बताया कि कल्लू का स्वयं मेरे पास फोन आया था। उसने कहा था कि मुझे ऑक्सीजन की बहुत जरूरत है मेरा ऑक्सीजन लेवल 70 तक नीचे गिर गया है। लेकिन ऑक्सीजन नहीं मिल रही है। इस पर मैने उससे कहा कि वो अपने किसी परिजन को मेडीकल वार्ड की प्रभारी के पास भेजे। वहां उससे वह एक फार्म भरवाएंगी तो उसका सिलेंडर भर जाएगा। बाद में कल्लू का फोन आया था कि उन्होंने फार्म भरने से इंकार कर दिया है। बाद में पता चला कि कल्लू की मौत हो गई। अगर जिला अस्पताल प्रबंधन उसे ऑक्सीजन उपलब्ध करा देता तो उस युवक की जान बच सकती थी।