कोरोना काल में फर्जी शादियाँ करवाने के मामलें में तत्कालीन CEO के खिलाफ मामला दर्ज

विदिशा, डेस्क रिपोर्ट। कोरोना संक्रमण काल में सरकारी पैसों से फर्जी शादियां करवाने के मामले में EOW ने सिरोंज के तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी शोभित त्रिपाठी के खिलाफ मामला दर्ज किया है। शोभित त्रिपाठी ने 14 महीनों में सरकारी पैसों से 3500 फर्जी शादियां करवाई थी। मामला 1 अप्रैल 2020 से 30 जून 2021 के बीच का है जब 3500 हितग्राहियों के विवाह करवाने के नाम पर 18 करोड़ 52 लाख 32 हजार रुपये निकाल लिए गए। मामला सामने आने के बाद शोभित त्रिपाठी को निलंबित कर दिया गया। सोमवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने समीक्षा बैठक के दौरान विदिशा कलेक्टर उमाशंकर भार्गव से इस मामले को लेकर नाराजगी जताई थी। इसके बाद गुरुवार को त्रिपाठी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। शोभित त्रिपाठी मंत्री गोपाल भार्गव के साढ़ू भाई हैं।

यह भी पढ़े.. मध्यप्रदेश में संक्रमितो का एक दिन में आंकड़ा हजार के पार, पॉजिटिविटी रेट भी बढ़ी

 

इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी नाराजगी जताई थी,वही मध्य प्रदेश के विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम ने इस मामले पर हैरानी जताई थी। जांच में यह सामने आया कि कोरोना लॉकडाउन के दौरान सामूहिक विवाह समारोह में सरकार ने रोक लगा रखी थी। इसके बावजूद सिरोंज के तत्कालीन सीईओ शोभित त्रिपाठी ने 1 अप्रैल 2020 से 30 जून 2021 के बीच करीब 3500 हितग्राहियों के विवाह सहायता के नाम पर 18 करोड़ 52 लाख 32 हजार रुपए निकाल लिए। इनमें ऐसे कई लोग शामिल हैं, जिनकी शादी पहले ही हो चुकी थीं। उनके नाम पर भी सरकारी सहायता राशि निकाली गई है। यह पैसा मुख्यमंत्री विवाह योजना के अंतर्गत सरकारी निकाला गया है। जांच एजेंसी को मिले साक्ष्य में सिरोंज में वर्ष 2019-21 के बीच 5923 शादियां की गई हैं। सभी हितग्राहियों को 51-51 हजार रुपए वितरित किए गए हैं। EOW ने जांच शुरू की, तो इसमें सामने आया कि कोरोना काल में एसडीएम ने 3500 जोड़ों की शादियों के नाम पर सरकारी पैसा निकाला है।

जांच में सामने आया ऐसी शादियाँ करवाई गई जिसमें लोगों ने आवेदन भी नहीं दिया और उनकी फर्जी शादियाँ कागजों में करवा दी गई, वही 27 साल के युवक की तीन बेटियों की शादी के नाम पर 51 51 हजार रुपये लिए गए, जांच एजेंसी को कई हितग्राहियों के दस्तावेज भी नहीं मिले। माना जा रहा कि घोटाला उजागर होने के बाद अधिकारियों ने भ्रष्टाचार के दस्तावेज गायब कर दिए। एसडीएम के अलावा अन्य कर्मचारियों की भी भूमिका को लेकर जांच की जा रही है।