ताबूत में आखिरी कील : शिंदे सरकार ने हासिल किया बहुमत, चार विधायक नहीं डाल पाए वोट

विधानसभा में सरकार के पक्ष में कुल 164 वोट पड़े हैं। प्रदेश में कुल 287 विधायक वर्तमान में है और सरकार बनाने के लिए 144 वोटों की जरूरत थी।

मुंबई, डेस्क रिपोर्ट। महाराष्ट्र में लगभग दो हफ्तों तक चला सियासी संग्राम आखिरकार अपने अंजाम तक पहुंच ही गया। मुंबई से विधायकों के साथ सूरत और फिर गुवाहाटी पहुंचे शिवसेना के बागी नेता एकनाथ शिंदे ने मुंबई वापस आकर बीजेपी के समर्थन के साथ कानूनन तौर पर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में गद्दी संभाल ली है। 30 जून को महाराष्ट्र के 20वें सीएम के रूप में शपथ लेने के बाद आज शिंदे के सामने विधानसभा में अपना बहुमत साबित करने की चुनौती थी, जो उन्होंने बड़ी आसानी से पास कर ली।

विधानसभा में सरकार के पक्ष में कुल 164 वोट पड़े हैं। प्रदेश में कुल 287 विधायक वर्तमान में है और सरकार बनाने के लिए 144 वोटों की जरूरत थी।

वोटिंग के दौरान कांग्रेस के अशोक चाव्हाण सहित 5 विधायक सदन से गायब रहे। प्रक्रिया के दौरान स्पीकर के निर्देश पर सदन में विधायकों की गिनती हुई। वोटिंग के दौरान उद्धव के करीबी संजय बांगड़ ने शिंदे के समर्थन में वोट डाला। वोटिंग में शरद पवार के करीबी और शेकपा के विधायक श्याम सुंदर ने भी शिंदे सरकार के सपोर्ट में वोट डाला है।

ये भी पढ़े … युवाओं के प्रेरणास्त्रोत, स्वामी विवेकानंद की पुण्यतिथि पर सीएम शिवराज ने किया नमन

क्या उद्धव से सीएम की गद्दी छीनने के बाद आदित्य से विधायकी छीनेंगे शिंदे

स्पीकर के चुनाव में जीत हासिल करने के बाद एकनाथ शिंदे गुट ने आदित्य ठाकरे सहित शिवसेना के 16 विधायकों को अयोग्य करार देने की मांग की है। इस मामले में शिंदे गुट के चीफ व्हिप भारत गोगावाले ने नए स्पीकर राहुल नार्वेकर को पत्र सौंपा है।

पत्र में कहा गया है कि 16 विधायकों ने व्हिप का उल्लंघन किया है, इसलिए इनकी सदस्यता रद्द होनी चाहिए। बागी गुट के 16 विधायकों की सदस्यता का मामला पहले से सुप्रीम कोर्ट में है।