RTI ने दिखाया आईना, देश में सर्वाधिक तेंदुओं का शिकार MP में, राजस्थान दूसरे नंबर पर

RTI के तहत मिली जानकारी के अनुसार पिछले 10 साल में प्रदेश में 405 तेंदुओं की मौत हुई है, जिसमें से 200 तेंदुओं (Leopard) का अवैध शिकार किया गया है।

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) कई सालों से तेंदुए के लिए जाना जाता है और देश में नंबर 1 की पोजिशन भी मध्यप्रदेश को हासिल है। लेकिन, अब तेंदुआ और बाघों की संख्या के बढ़ने के साथ उनकी सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। प्रथम पोजिशन के साथ केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय (Union Ministry of Forest and Environment)ने मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) को ‘टाइगर स्टेट’ (Tiger State) और ‘लेपर्ड स्टेट’ (Leopard State) खिताब से भी नवाजा है। लेकिन, अब तेंदुआ के शिकार जैसे मामले में भी प्रदेश ने प्रथम पोजिशन हासिल कर ली है।

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दरअसल रणथंभौर नेशनल पार्क (Ranthambore National Park) द्वारा जारी की गई रिपोर्ट के मुताबिक देश में लगभग 2000 तेंदुओ का शिकार पिछले 5 सालों में किया गया है। साथ ही सेंटर फॉर वाइल्डलाइफ स्टडीज की रिपोर्ट भी कहती है कि पिछले कुछ सालों में तेंदुओं की आबादी में 70 से 90% की कमी दर्ज की गई है। वहीं अगर बात की जाए  वन विभाग मध्य प्रदेश से RTI के तहत मिली जानकारी की तो, उसके मुताबिक पिछले 10 साल में प्रदेश में 405 तेंदुओं की मौत हुई है, जिसमें से 200 तेंदुओं का अवैध शिकार किया गया है।

प्रदेश में वन मंडलों और राष्ट्रीय उद्यानों (Forest Divisions and National Parks)  में लगातार तेंदुओं की मौत हो रही है, और आंकड़ों की बात करें तो

  • पन्ना टाइगर रिजर्व में 21
  • कान्हा टाइगर रिजर्व में 15
  • पेंच टाइगर रिजर्व में 13
  • बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में 12
  • सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में 10
  • बालाघाट वन मंडल में 20
  • छिंदवाड़ा वन मंडल में 18
  • कटनी में 15
  • सिवनी में 13
  • शहडोल में 12
  • पन्ना में 10
  • नरसिंहपुर में 9
  • अब्दुल्लागंज में 9
  • होशंगाबाद-सीहोर-शिवपुरी में 7-7
  • ग्वालियर और मंडला में 6-6,
  • जबलपुर में 5 तेंदुओं की मौत हुई है।

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ऐसे में अगर रणथंभौर नेशनल पार्क (Ranthambore National Park)  की रिपोर्ट देखें तो उसके मुताबिक मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) और राजस्थान में तेंदुओं के शिकार के सब से ज्यादा मामले सामने आए हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि 2014 में 331, 2015 में 341, 2016 में 440, 2017 में 431, 2018 में 460 तो 2019 में 494 तेंदुओं का शिकार किया गया है। आंकड़ों को देखकर लग रहा शिकारी बेखौफ होकर तेंदुओं का शिकार कर रहे हैं।