संसार में ऐसे व्यक्ति भी हैं जिनके पास दौलत तो खूब है लेकिन शांति नहीं है- मुनिश्री

मुनिश्री ने कहा कि जीवन का लक्ष्य आत्म शांति होना चाहिए। आत्म शांति इस रंग-बिरंगी मृग मारीचिका में नहीं मिल सकती। शांति भवनों में नहीं, शांति विषयों में नहीं, शांति तो अपने अन्दर है।

दतिया, सत्येन्द्र रावत। व्यक्ति चाहे करोड़ों कमाले, हीरा मोती, जवाहरात के ढेर लगाले लेकिन रुपये पैसे से व्यक्ति अमर नहीं बन सकता। धन केवल सुविधा दे सकता है, मृत्यु से विजय नहीं दिला सकता। मृत्यु साष्वत सत्य है । रुपये पैसे से मौत पर  विजय नहीं पाई जा सकती है। धन से सिफ सुविधाएं ही खरीदी जा सकती है। संसार में ऐसे व्यक्ति भी हैं जिनके पास दौलत तो खूब है लेकिन शांति नहीं है।  यह विचार क्रांतिकारी मुनिश्री प्रतीक सागर महाराज ने आज शुक्रवार को सोनागिर स्थित  आचार्यश्री पुष्पदंत सागर सभागृह में धर्मसभा को संबोधित करते हुए कही।

रिश्तों पर उद्बोधन देते हुए मुनिश्री ने कहा कि संसार के समस्त रिश्ते स्वार्थ के वषीभूत होकर चल रहे हैं। व्यक्ति जो कुछ करता है वो स्वयं की खुशी  के लिए करता है।  स्वयं का सुख और स्वयं का प्रेम ही सभी रिश्तों को आगे बढाता है, चाहे रिश्ता पति-पत्नी का हो, बाप-बेटा का हो, भाई-भाई का हो अथवा कोई भी रिश्ता हो सिर्फ स्वयं के स्वार्थ के लिये ही रिश्तें चलते रहते हैं।

पति को पत्नि से और पत्नी को पति से सुख मिलता है, पिता यह सोचकर पुत्र का ध्यान रखता है कि वो बुढापे में उसका सहारा बनेगा, वहीं पुत्र पिता से धन मिले इसीलिए रिश्तों को निभाते हैं। प्रभू से भी व्यक्ति हमेशा कुछ न कुछ लेने की लालसा में ही हाथ जोडता है या उसके द्वार जाता है।

जीवन का लक्ष्य आत्म शांति होना चाहिए

मुनिश्री ने कहा कि जीवन का लक्ष्य आत्म शांति होना चाहिए। आत्म शांति इस रंग-बिरंगी मृग मारीचिका में नहीं मिल सकती। शांति भवनों में नहीं, शांति विषयों में नहीं, शांति तो अपने अन्दर है। इस शांति के लिए मात्र अपने अंदर जाना है। जब हम अपनी दृष्टि को पर पदार्थ से यानि विषय कषायों से हटा लेते हैं तो हमारे अन्दर ही शांति का झरना फूट पड़ता है। अपने भीतर देखो, अपने भीतर ही सब कुछ है, अपने भीतर जाना ही दुनियाँ को समझना है।

गुरू हमें जीवन जीने की कला सिखाते हैं

मुनिश्री ने कहा कि गुरू हमें जीवन जीने की कला सिखाते हैं और हमें संस्कारित कर होनहार बनाते हैं। हमारे अज्ञान को मिटाकर सूर्य के प्रकाश के समान ज्ञान प्रदान करते हैं। बुराईयों से अच्छाई का मार्ग बताते हैं। गुरू हर समय शिष्य का भला और अच्छा चाहते हैं। कोई भी गुरू किसी भी शिष्य का बुरा नहीं चाहता। गुरू संस्कारों को जन्म देकर हमें अच्छे संस्कार प्रदान करते हुए हमारे जीवन का सुधार करते हैं।

मुनिश्री के प्रतिदिन मंगल प्रवचन होंगे

चातुर्मास समिति के प्रचार संयोजक सचिन जैन आदर्श ने बताया कि मुनिश्री प्रतीक सागर महाराज के मंगल प्रवचन प्रतिदिन होंगे। वही रविवार को दोपहर 3:00 बजे से विशेष धर्म सभा का आयोजन भट्ठारक कोठी के सामने अमोल वाली धर्मशाला के आचार्य पुष्पदंत सागर सभागृह में आयोजन किया जाएगा।

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