Thursday Special: जीवन की उलझनों का समाधान है ये छोटा सा काम, करते ही मिलते है अद्भुत लाभ लाभ

Thursday Special: गुरु स्तोत्र एक भक्ति भजन है जो हिंदू परंपरा में पूजनीय गुरु, आध्यात्मिक शिक्षक को समर्पित है. ऐसा माना जाता है कि गुरुवार को गुरु स्तोत्र का पाठ करने से जीवन की परेशानियां दूर हो सकती हैं और भक्त को आशीर्वाद मिल सकता है।

thursday

Thursday Special: सनातन धर्म में, सप्ताह का प्रत्येक दिन किसी न किसी देवी-देवता को समर्पित है। उसी प्रकार, गुरुवार का दिन देवगुरु बृहस्पति और जगत के पालनहार भगवान विष्णु को समर्पित है। इस पवित्र दिन पर, स्नान करने के बाद, भक्तों को श्री हरि और देवगुरु बृहस्पति की पूजा करनी चाहिए। धार्मिक मान्यता है कि भगवान की पूजा करने से सभी कार्यों में सफलता प्राप्त होती है और धन-वृद्धि होती है। पूजा के दौरान गुरु स्तोत्र का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है। ऐसा करने से जीवन में आने वाली सभी परेशानियां दूर होती हैं और जीवन खुशहाली से भर जाता है।

गुरुवार का महत्व

हिंदू धर्म में गुरुवार को आध्यात्मिक कार्यों के लिए शुभ दिन माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन ब्रह्मांड के पालनकर्ता भगवान विष्णु विराजमान होते हैं। इसलिए इस दिन गुरु स्तोत्र का पाठ करना विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है।

गुरु स्तोत्र

गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः।

गुरुस्साक्षात्परं ब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः ॥

अज्ञानतिमिरान्धस्य ज्ञानाञ्जनशलाकया।

चक्षुरुन्मीलितं येन तस्मै श्री गुरवे नमः॥

अखण्डमण्डलाकारं व्याप्तं येन चराचरं।

तत्पदं दर्शितं येन तस्मै श्री गुरवे नमः ॥

अनेकजन्मसंप्राप्तकर्मबन्धविदाहिने ।

आत्मज्ञानप्रदानेन तस्मै श्री गुरवे नमः ॥

मन्नाथः श्रीजगन्नाथो मद्गुरुः श्रीजगद्गुरुः।

ममात्मासर्वभूतात्मा तस्मै श्री गुरवे नमः ॥

बर्ह्मानन्दं परमसुखदं केवलं ज्ञानमूर्तिम्,

द्वन्द्वातीतं गगनसदृशं तत्त्वमस्यादिलक्ष्यम्।

एकं नित्यं विमलमचलं सर्वधीसाक्षिभूतं,

भावातीतं त्रिगुणरहितं सद्गुरुं तं नमामि ॥

बृहस्पति कवच

अभीष्टफलदं देवं सर्वज्ञम् सुर पूजितम् ।

अक्षमालाधरं शांतं प्रणमामि बृहस्पतिम् ॥

बृहस्पतिः शिरः पातु ललाटं पातु मे गुरुः ।

कर्णौ सुरगुरुः पातु नेत्रे मे अभीष्ठदायकः ॥

जिह्वां पातु सुराचार्यो नासां मे वेदपारगः ।

मुखं मे पातु सर्वज्ञो कंठं मे देवतागुरुः ॥

भुजावांगिरसः पातु करौ पातु शुभप्रदः ।

स्तनौ मे पातु वागीशः कुक्षिं मे शुभलक्षणः ॥

नाभिं केवगुरुः पातु मध्यं पातु सुखप्रदः ।

कटिं पातु जगवंद्य ऊरू मे पातु वाक्पतिः ॥

जानुजंघे सुराचार्यो पादौ विश्वात्मकस्तथा ।

अन्यानि यानि चांगानि रक्षेन्मे सर्वतो गुरुः ॥

इत्येतत्कवचं दिव्यं त्रिसंध्यं यः पठेन्नरः ।

सर्वान्कामानवाप्नोति सर्वत्र विजयी भवेत् ॥

Disclaimer- यहां दी गई सूचना सामान्य जानकारी के आधार पर बताई गई है। इनके सत्य और सटीक होने का दावा MP Breaking News नहीं करता।


About Author
भावना चौबे

भावना चौबे

इस रंगीन दुनिया में खबरों का अपना अलग ही रंग होता है। यह रंग इतना चमकदार होता है कि सभी की आंखें खोल देता है। यह कहना बिल्कुल गलत नहीं होगा कि कलम में बहुत ताकत होती है। इसी ताकत को बरकरार रखने के लिए मैं हर रोज पत्रकारिता के नए-नए पहलुओं को समझती और सीखती हूं। मैंने श्री वैष्णव इंस्टिट्यूट ऑफ़ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन इंदौर से बीए स्नातक किया है। अपनी रुचि को आगे बढ़ाते हुए, मैं अब DAVV यूनिवर्सिटी में इसी विषय में स्नातकोत्तर कर रही हूं। पत्रकारिता का यह सफर अभी शुरू हुआ है, लेकिन मैं इसमें आगे बढ़ने के लिए उत्सुक हूं।मुझे कंटेंट राइटिंग, कॉपी राइटिंग और वॉइस ओवर का अच्छा ज्ञान है। मुझे मनोरंजन, जीवनशैली और धर्म जैसे विषयों पर लिखना अच्छा लगता है। मेरा मानना है कि पत्रकारिता समाज का दर्पण है। यह समाज को सच दिखाने और लोगों को जागरूक करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। मैं अपनी लेखनी के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास करूंगी।