डिप्रेशन को हरा कमलप्रीत कौर ने रचा टोक्यो ओलंपिक में इतिहास, गोल्ड से बस एक कदम दूर

दिल्ली, डेस्क रिपोर्ट।  टोक्यो ओलंपिक (Tokyo Olympic) के डिस्कस थ्रो में देश की कमलप्रीत कौर ने इतिहास रच दिया है। अपने बेहतरीन प्रदर्शन के चलते कमलप्रीत कौर ने फाइनल्स में जगह बना ली है और भारत को एक और मेडल जीताने की उम्मीद जगा दी है। कमलप्रीत कौर ने तीसरे प्रयास में 64 स्कोर बनाकर फाइनल में जगह बनाई है। बता दें कि कमलप्रीत नेशनल रिकॉर्ड होल्डर हैं। कमलप्रीत ने हाल ही में  एक इंटरव्यू में बताया था कि वह डिप्रेशन के कारण ये खेल छोड़ना चाहती थीं। उन्होंने कहा था, “2020 के अंत में मैं डिप्रेशन में चली गई थी क्योंकि मैं न अभ्यास कर पा रही थी और न ही टूर्नामेंट्स खेल पा रही थी इसका कारण कोविड-19 की पाबंदियां थीं। लेकिन डिप्रेशन को हराकर बाहर निकली कमलप्रीत ने उदाहरण पेश कर दिया।

कमलप्रीत ने अपने पहले प्रयास में 60.29 मीटर और दूसरे प्रयास में 63.97 मीटर का थ्रो किया था। वो दूसरे स्थान पर हैं। उन्होंने ग्रुप बी के क्वालिफिकेशन राउंड शानदार प्रदर्शन किया। भारत की सीमा पूनिया ग्रुप ए के क्वालीफाई राउंड में छठे नंबर पर थीं।

पंजाब के श्री मुक्तसर साहिब जिले की रहने वाली कमलप्रीत कौर ने एक इंटरव्यू के दौरान बताया था कि वो पढ़ाई में कमजोर थीं। उन्हें उनके कोच ने कहा था कि वो राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में हिस्सा लें। जहां उनका प्रदर्शन संतोषजनक था। इस प्रतियोगिता में वो चौथे स्थान पर रही थीं। पढ़ाई में कमजोर कमलप्रीत ने खेल पर ध्यान देना शुरू कर दिया।

2014 में कमलप्रीत कौर अपने खेल को लेकर गंभीर हो गईं। भारतीय खेल प्राधिकरण में उनकी ट्रेनिंग शुरू हुई। धीरे-धीरे उनकी मेहनत और जूनून रंग लाने लगा। 2016 में वो अंडर-18 और अंडर-20 राष्ट्रीय चैम्पियन बनीं। दोहा में 2019 में हुए एशियाइ एथलेटिक्स चैम्पियनशिप कमलप्रीत पांचवें स्थान पर रहीं। डिस्कस थ्रो में उन्होंने 65 मीटर का थ्रो किया था। ऐसा करने वाली वो पहली महिला थीं। 2019 में संस्करण में उन्होंने गोल्ड हासिल किया था। कमलप्रीत ने 60.25 मीटर डिस्कस थ्रो किया था। कमलप्रीत कौर ने साल 2014 से खेल के प्रति दिलचस्पी दिखाई और गंभीर हुईं। उनकी शुरुआती ट्रेनिंग भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) केंद्र में उनके गांव में शुरू हुई। कमलप्रीत की कड़ी मेहनत और जुनून ने रंग लाना शुरू किया। वह 2016 में अंडर-18 और अंडर-20 राष्ट्रीय चैम्पियन बनीं।

देश का नाम रोशन करने वाली कमल 2014 से डिस्क थ्रो की तैयारी कर रही थी पर Covid 19 संक्रमण के बाद सेंटर के बंद होने से डिप्रेशन में चली गई, और गेम को छोड़कर क्रिकेट में जाने का मन बनाने लगी थी। फिलहाल आज के बेहतरीन प्रदर्शन के बाद उन्हे मिलने वाली बधाइयों का तांता लग गया है, उनकी इस उपलब्धि पर वीरेंद्र सहवाग सहित अनेक दिगाजों ने उन्हें बधाई दी । द्रोणाचार्य अवॉर्डी फॉर्मर डिस्कस थ्रो कोच वीरेंद्र पूनिया का कहना है कि कमल प्रीत के पास हर वो खासियत है जो नंबर 1 डिस्कस थ्रोअर के पास होना चाहिए, चाहे वो फिजिक की बात हो, या हाइट की या ताकत की, आर्म लंबाई हो । उन्होंने यह भी कहा है कि यदि कमलप्रीत अपना पर्सनल बेस्ट ओलंपिक के फाइनल में दोहरा लेती हैं तो निश्चित ही वह ओलंपिक के गोल्ड मेडल जीत सकती हैं। फिलहाल अब अगला मुकाबला सोमवार को होगा ।