चानू के चैंपियन बनने की कहानी! मणिपुर की मीराबाई कैसे बनी भारत की ‘सिल्वर गर्ल’

निश्चित तौर पर आज का दिन भारत के लिए खास है। मीराबाई चानू ने भारत के लिए इतिहास रच दिया है। मीराबाई ने टोक्यो ओलंपिक 2020 में भारोत्तोलन में रजत पदक जीता है। मीराबाई के बारे में जानें

खेल, डेस्क रिपोर्ट। ओलंपिक (olympic) इतिहास के साथ निश्चित रूप से आज का दिन भारत के लिए बेहद खास हो गया है। भारत की मीराबाई चानू (mirbai chanu) ने इतिहास रच दिया है। दरअसल टोक्यो ओलंपिक 2020 (Tokyo olympic 2020) के भारोत्तोलन (weightlifting) में रजत पदक (silver medal) जीतते हुए मीराबाई ने भारोत्तोलन में भारत के 21 साल के सुखाड़ का आखिरकार अंत कर दिया है।

दरअसल टोक्यो ओलंपिक 2020 (Tokyo olympic 2020) में भारत ने पहला पदक (medal) अपने नाम किया है। मीराबाई चानू ने पहले प्रयास में ही सफलता हासिल की है। 84 किलोग्राम भार उठाते हुए चानू दूसरे प्रयास में 87 किलोग्राम सफलतापूर्वक उठाने में कामयाब रही। हालांकि तीसरे प्रयास में 89 किलोग्राम उठाने के प्रयास में असफल रही बावजूद इसके उन्होंने क्लीन एंड जर्क रूप में मेडल जीते हैं।

मीराबाई कैसे बनी भारत की ‘सिल्वर गर्ल’

टोक्यो ओलंपिक (tokyo olympic) में पहला पदक अपने नाम करने के साथ ही चानू इतिहास रच दिया है। हालांकि चानू के कामयाबी की यह कहानी इतनी आसान नहीं थी। बचपन की कठिनाई सहित कड़ी मेहनत के बाद आज चानू ने यह मुकाम हासिल किया है और इसके साथ ही भारत के लिए इतिहास में अपना नाम सुनहरे अक्षरों में दर्ज करा लिया है।

चानू के अंदर अपने सपने को पूरा करने का ये हुनर बचपन से ही उनके साथ रहा। 12 वर्ष की उम्र में चानू अपने बड़े भाई से ज्यादा वजन की लकड़ियां इकट्ठा करती थी। हालांकि तब किसे पता था कि उनकी वह कठिनाई आज उनके लिए स्वर्णिम समय के रूप में उभर कर सामने आएगी। रियो ओलंपिक में हार के बावजूद भी चानू ने अपने हिम्मत को टूटने नहीं दिया और उन्हें दोबारा कोशिश की। निडर होकर चानू ने जोश के साथ मैदान में वापसी की और आज रजत पदक जीतकर उन्होंने इतिहास रच दिया।

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मीराबाई चानू का जन्म मणिपुर में हुआ है। शुरुआत में मीराबाई चानू तीरंदाजी सीखना चाहती थी और उनका सपना तीरंदाज बनने का था। हालांकि समय उनसे कुछ और चाहता था और उन्होंने वेटलिफ्टिंग की तरफ रुख कर लिया। आज वह देश के शीर्ष भारोत्तोलक में जानी जाती हैं। इम्फाल भारोत्तोलक कुंजारानी से प्रभावित होकर मीराबाई चानू ने भारोत्तोलन मैं कैरियर बनाने की सोची और इसके लिए उन्होंने प्रयास भी जारी रखा और आज उनके फैसले ने भारत को एक सफल भारोत्तोलक दिया है।

रियो ओलंपिक में उन्हें करना पड़ा हार का सामना 

ज्ञात हो कि मीराबाई ने 2014 ग्लासको कॉमनवेल्थ गेम में भारत के लिए सिल्वर मेडल जीता था और वहीं से उन्हें स्टार वेटलिफ्टर के रूप में पहचान मिली थी। अमेरिका में 50 दिन का प्रशिक्षण पूरा करने के बाद वह सीधे टोक्यो पहुँची। हालांकि रियो ओलंपिक में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। जिसके बाद उनकी काफी आलोचना भी की गई लेकिन उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और अपने प्रयास को जारी रखते हुए 2017 विश्व चैंपियनशिप और 2018 राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक अपने नाम किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चानू को बधाई दी

आज टोक्यो ओलंपिक वेटलिफ्टिंग में मीराबाई चानू के सिल्वर मेडल जीतने के साथ ही भारत सहित विश्व भर में उनकी तारीफ हो रही है। चानू भारत के लिए भारोत्तोलन में रजत पदक जीतने वाली पहली महिला है। उन्होंने 49 किलोग्राम वर्ग में सिल्वर पदक हासिल किया है। वही चानू की जीत पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित गृह मंत्री अमित शाह सहित सभी देशवासी ने चानू को बधाई दी है और भारत के गर्व के रूप में उन्हें सराहा जा रहा है।